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पहली बार निर्यात आंकड़ा पंहुचा 10000 हजार करोड़ के पार –पढ़े कारपेट कोम्पक्ट का नया अंक ;

प्‍लास्टिक की बोतलों से हो रहा दरी का निर्माण || कालीन नगरी भदोही में बुनकरों के बच्चे में कुपोषण की बढ़ती समस्या || नकली सोना गिरवी रखकर स्टेट बैंक से असली कर्ज, 27 पर मुकदमा|| टेक्सटाइल इंडस्ट्री का हब पानीपत || कुटीर उद्योगों के लिए 800 क्लस्टर होंगे स्थापित|| अपनी अनूठी कारीगरी के लिए भदोही का कालीन उद्योग देश विदेश में पहचाना जाता है || रखी गयी कालीन उद्योग के उम्मीद की पहली ईंट||New Centre-state council to give boost to exports ||चीन और ऑस्‍ट्रेलि‍या की ओर चले भारत के कारपेट निर्माता, नए बाजार की तलाश में इंडस्‍ट्रीपहली बार निर्यात आंकड़ा पंहुचा 8000 हजार करोड़ के पार || कब होगा इंटरेस्ट में कमी कि घोषणा ||कौन करेगा मार्ट का संचालन ||उत्तर प्रदेश कारपेट कौंसिल कब होगा गठन ||विवादों में एसाइड योजना || कश्मीर से तालुक रखने वाले परिषद के चेयरमैन कैसे है भदोही से नाता || वाराणसी एक्सपो को लेकर क्या चल रही है तैयारी ||उत्तर प्रदेश सरकार ने घोषित कि नयी एक्सपोर्ट पोलिसी EXPORT POLICY (Draft) GOVERNMENT OF UTTAR PRADESH 2015-20 ||योग दिवस पर मैट को लेकर क्यों उठे सवाल

14 August 2014

सोशल विजन पत्रिका


सोशल विजन पत्रिका 


सोशल विजन –-2013
संपादकीय
स्थाई विकास पर जोर की आवश्यकता
महात्मा गाँधी नरेगा लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में आशा का संचार हुआ था कि उन्हें रोजगार भले ही न मिले लेकिन बेरोजगारी भत्ता तो अवश्य ही मिल जायेगा। भत्ते की बात तो दूर काम भी नही मिला। उसके पीछे जहां गांव की राजनीति रही, वंही जागरूकता का भी अभाव रहा। जाब कार्ड धारकों को तो उसके नियम-कानून की जानकारी का होना तो दूर की बात है, प्रधान और सचिवों को भी इसकी जानकारी नहीं है। इस कारण योजना के क्रियान्वयन में तेजी नहीं आ पा रही है। लगातार इसके नियमों में फेरबदल करके इसे बेहतर बनाने की कोशिश लगातार की जाती रही है। प्रधानों द्वारा भी इसके नियमों में लगातार परिवर्तन की मांग की जाती रहती है। इस योजना में सबसे बड़ी बांधा 60 और 40 के अनुपात के कारण भी है। 



गांव में आजादी के बाद से मिटटी के ही कच्चे काम होते रहे है इससे गांवों में कच्चे काम की मात्रा बहुत कम रह गयी है। मनरेगा में राज्य और केन्द्र सरकार ने लगभग 50 नये काम जोड़े जिसका बहुत लाभ नहीं मिल पाया इसका एक बड़ा कारण यह रहा है कि ये काम ज्यादातर अनुसूचित जाति या गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों के लिए बनाये गये। कोई परिवार गरीबी रेखा के नीचे इसलिए आता है क्योंकि उसके पास अपने संसाधन या जमीन नहीं होती है। ऐसे में मनरेगा में ज्यादातर नये कामों को कैसे कराया जायेगा। हांलाकि इनके न मिलने पर लघु और सीमांत किसानों के यहां कार्य कराये जा सकतहैं लेकिन जानकारी और जागरूकता के अभाव में लोग इसका लाभ उठा नहीं पा रहे हैं। अब योजना में स्थाई विकास पर जोर देने की आवश्यकता है। मनरेगा में भविष्य में एक बड़ी समस्या आने वाली है कर्मचारियों का मानदेय की योजना में रोज नये कर्मचारी जुड़ते जा रहे है। उनके मानदेय की मांग दुगुनी-तिगुनी होती जा रही है और कहीं-कहीं तो स्थायी करने की मांग भी हो रही है। ऐसे में 5 प्रतिशत प्रशासनिक व्यय में उनकी सैलरी कैसे दी जा सकेगी। इसके अलावा मनरेगा को बेहतर बनाने के लिए इन्हें कभी लैपटाप, मोबाइल, कैमरा सहित अन्य खर्चीले संसाधन देने के भी निर्देश दिए जाते रहे हैं। मनरेगा में उत्तर प्रदेश सरकार शिकायत निवारण नियमावली 2009, शिकायतों का निपटारा करने में प्रभावशाली हो सकती है। लेकिन ये नियम सालों से फाइलों में ही पड़ी है। आम जनता के साथ-साथ प्रशासनिक आधिकारियों को भी इस नियम के बारे में व्यापक प्रचार प्रसार करने की आवश्यकता है। पत्रिका के प्रयासों पर पाठकों की प्रतिक्रिया ने पूरी टीम का उत्साह बढ़ाया है। पत्रिका के अंक के लोकार्पण कार्यक्रम में देश के दिग्गज पत्रकारों और पत्रकारिता शिक्षाविदों ने सराहा है। उनके सुझावों से पत्रिका और बेहतर करने में मदद मिलेगी। इस अंक से एक नया कालम शुरू किया जा रहा है। जिससे गांव में रहने वाले युवा कम्प्यूटर और इण्टरनेट के माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान आसानी से कर सकेंगे। पत्रिका के प्रति हजारों पाठकों की प्रतिक्रियाओं से सोशल विजन की टीम बहुत ही उत्साहित है।
आशा है कि यह अंक भी आपके और आपके गांव के विकास में उपयोगी सिद्ध होगी।
संजय श्रीवास्तव



पाठकनामा
गावों का विकास किए बिना देश का विकास संभव नहीं है। भारत की अधिकांश आबादी अब भी मूलभूत सुविधाओं के आभाव से ग्रस्त है। जन सहभागिता के आभाव में ग्रामीण विकास के लिए किए गए कार्यों के अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके हैं। पत्रिका के उज्जवल भविष्य हेतु मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। मुलायम सिंह यादव, राष्टीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
पत्रिका में शासकीय योजनाओं एवं ग्राम से संबंधित विधिक जानकारी का समावेश किया गया है। पत्रिका ग्रामीण जीवन के उत्थान एवं जागरूकता उत्पन्न करने में अवश्य उपयोगी सिद्ध होगी। आप इस सराहनीय प्रयास के लिए निश्चय ही बधाई के पात्र हैं। सुरेन्द्र सिंह, आई ए एस
पत्रिका पढ़ कर नयी जानकारियां मिली। पत्रिका आम लोगों के अलावां शासन एवं प्रशासन के लिए भी उपयोगी है। पत्रिका में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के बारे में दी गयी जानकारी महत्वपूर्ण थी। इससे प्राथमिक शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद मिली। कई गावों में आपकी पत्रिका पढ़ने के बाद प्राथमिक स्कूलों में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के जांच पड़ताल में उपयोगी सिद्ध हुयी।  शुभकामनाओं सहित  राममणि त्रिपाठी, जिला विकास अधिकारी, उन्नाव
पत्रिका में दी जानकारी बेहतर तथा सूचनाओं पर केन्द्रित थी। इससे लोगों को लाभ मिलना स्वभाविक है। पत्रिका में और विषयों का समावेश करें। सुरेन्द्र सिंह, पूर्व मुख्य विकास अधिकारी,
पत्रिका का प्रयास अच्छा है। काफी जानकारियां मिली लेकिन इसमें जगह विशेष को महत्व दिया गया था। कृपया अपनी पत्रिका को और व्यापक करें और तमाम अन्य जिलों के मुद्वो को समावेशित करें। कानूनी जानकारियों को भी बढ़ाएं। एस के श्रीवास्तव, जिला विकास अधिकारी
पहली बार इस तरह की जानकारी मिलने से जागरूकता बढ़ी है। राजनीतिक कार्यकर्ता होने के कारण लोगों की अपेक्षाएं बहुत ज्यादा होती हैं। इस पत्रिका की जानकारी से तमाम लोगों की मदद करने का तरीका मिला है। आपकी पत्रिका में दी गयी स्कूल प्रबंधन समिति (एस एम सी) गठन की जानकारी को पढ़कर मेरे गांव भीखमापुर भदोही में गलत ढंग से बनाए गए एसएमसी की शिकायत पत्रिका की फोटो कापी लगाकर की। जिसका परिणाम यह रहा कि वहां की एएमसी निरस्त कर दोबारा एसएमसी का गठन किया गया। इसके लिए मेरा पूरा गांव आपका आभारी है। महेन्द्र बिंद जिलाध्यक्ष, प्रगतिशील मानव समाज पार्टी
पत्रिका में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य बीमा योजना के बारे में आपके द्वारा जो जानकारी दी गयी थी, उसमें अस्पतालों का पक्ष बेहतर ढंग से नहीं रखा गया था। बीमा कंपनियों द्वारा लंबे समय से अस्पतालों को भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिससे अस्पताल मरीजों का इलाज करने में कतराने लगे हैं जबकि बीमा कंपनियों को नियमानुसार एक माह के अंदर भुगतान कर देना चाहिए था। अगले अंक में इस मुद्दे को भी उठाएं।डॉ. अश्वनि कुमार मौर्य
लोगों को ज्ञान प्राप्त होना चाहिए पत्रिका ग्राम प्रधानों के लिए बहुत ही उपयोगी है। सीताराम गिरी,अभोली
पत्रिका हर माह मिलती रहनी चाहिए आप द्वारा दी स्कूलों की जानकारी पढ़कर हम किसी भी व्यक्ति को प्रेरित कर सकते हैं इसकी जानकारियां बहुत ही उपयोगी हैं। रमाशंकर शर्मा, बदलापुर, जौनपुर
पत्रिका में दिए गए मनरेगा हेल्पलाईन नम्बर पर मैने तत्काल अपने गांव के 35 लोगों के लिए काम का आवेदन किया। आवेदन के तीसरे दिन ही मनरेगा की एपीओ अधिकारी का फोन आया। उनका कहना था कि आपको शिकायत करने की क्या आवश्यकता थी, तुम आकर मुझसे मिलो। मैने कहा कि मै क्यों आकर मिलूं, तो अधिकारी धमकी देने लगा कि आज के बाद शिकायत दर्ज करायी तो खैर नहीं। ग्राम प्रधान ने भी कुछ महिलाओं को कहा कि एक सादे पन्ने पर हस्ताक्षर करो कि हमें काम नहीं चाहिए। लेकिन महिलाओं ने इनकार कर दियाए अभी चैदह दिन बीतने के बाद भी काम नहीं मिला है। इसलिए मै दोबारा हेल्पलाइन पर शिकायत करने वाला हूं ताकि मुआवजा मिल सके। मैं आपसे सहयोग की आशा रखता हूं। पत्रिका पढ़ने के बाद जो उर्जा मिली है उससे मैं भ्रष्ट अधिकारियों से संघर्ष करने में सक्षम हूं।
विनय कुमार, ग्राम-बरियारपुर, विकास परतावल, जनपद महाराजगंज

हेल्पलाईन  -- 8188887200
समस्या आपकी, सुझाव हमारे
इस कालम में आपकी समस्याओं के समाधान के लिये हमारे विशेषज्ञ संबंधित विभाग से जानकारी लेकर आपको उसका उत्तर देते हैं।

मै गरीबी रेखा के नीचे हूं। मेरे परिवार के कुछ सदस्य मुंबई में रहते हैं। मेरे यहां राष्ट्रीय ग्रामीण बीमा योजना का कार्ड बन रहा है। क्या मै दो कार्ड बनवा सकती हूं?
रेणू चैधरी (गाजियाबाद)
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य बीमा योजना में यह सुविधा है कि यदि परिवार के सदस्य दो स्थानों पर रहते हैं। तो वह अपने मूल कार्ड के दो कार्ड बनवा सकते हैं। इस कार्ड में कुल दोनों कार्डों में कुल राशि तीस हजार रूप्ए से ज्यादा नहीं होगी। आप अपनी सुविधानुसार किस कार्ड में कितनी धनराशि रखनी है, यह तय कर सकतीं हैं। यह काम आप जिले स्तर पर बीमा कंपनियों द्वारा बनाये गए सहायता केन्द्र पर जाकर करा सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ शुल्क देना होगा।
मैं वाराणसी जनपद का हूं। मेरा बीमा कार्ड बनारस में बना था। क्या इस कार्ड से किसी अन्य जिले में इलाज कराया जा सकता है?
सुरेश, वाराणसी
यह कार्ड पूरे देश में मान्य है। आपका कार्ड कहीं का बना हो आप उस पर कहीं भी इलाज करा सकते हैं। इस योजना में पंजिकृत अस्पताल अपका इलाज करने से मना नहीं कर सकते हैं। यदि आपको कोई परेशानी हो तो आप टोल फ्री नम्बर 1800-1800-4444 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
मेरे गांव में राशन गल्ले की दुकान पर कब अनाज आता है। मुझे नहीं पता चल पाता है। क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे यह जानकारी हो सके कि दुकान पर राशन कब आया।
शम्भू नाथ (गोरखपुर)
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ऐसी योजना बनायी है। जिसमें आप अपना मोबाईल नम्बर रजिस्टर्ड कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद आपके मोबाईल नम्बर पर अपने आप एसएमएस आयेगा कि आपके राशन की दुकान पर कितना सामान किस समय और किस तारीख को किस गाड़ी से आया है।  www.fcs.up.nic.in इस वेबसाईट पर जाकर आप अपना मोबाईल नम्बर रजिस्टर्ड करा सकते हैं।
मेरे गांव में बहुत सारे फर्जी मतदाता शामिल हो गए हैं। उनका नाम वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए क्या करना चाहिए।
विनीत (जौनपुर)
इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एक सुविधा दी गयी है। जिसमें फार्म-7 भरकर आप किसी का नाम हटाने के लिए अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। वहीं मतदाता सूची में किसी का नाम सही कराने के लिए फार्म-8 का प्रयोग कर सकते हैं। यह फार्म आप आयोग की वेबसाईट www.ceouttarpradesh.nic.in पद से भी डाउनलोड कर सकते हैं। किसी प्रकार की समस्या होने पर आयोग के काल सेंटर नम्बर 18001801950 पर फोन करके अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं।
मेरे यहां प्राइमरी स्कूल में पिछले सप्ताह ड्रेस वितरण किया गया। जिनमें ड्रेसों की गुणवत्ता अच्छी नहीं थी, इसके लिए हमें क्या करना चाहिए।
रमेश (भदोही)
इस बार ड्रेस वितरण में गुणवत्ता के लिए सरकार ने कड़े नियम बनाये हैं। जिसमें पांच सदस्यीय क्रय समिति बनायी जायेगी जिसमें प्रधान, हेडमास्टर, वार्ड मेम्बर, एसएमसी अध्यक्ष, एक सदस्य को शामिल करना है। इसके पश्चात पूरी 15 सदस्यीय समिति की कपड़े की गुणवत्ता पर मुहर लगने के बाद सस्ता और सबसे अच्छा ड्रेस खरीदा जायेगा। इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि ड्रेस की खरीददारी के बाद ड्रेस विक्रेताओं को 25 फीसदी भुगतान गुणवत्ता परखने के बाद एक माह में किया जायेगा। इसलिए आप ड्रेस की खरीददारी के बारे में जानकारी और खरीददारी में गड़बड़ी की शिकायत भी इस टोल फ्री नम्बर 1800-805533 पर कर सकते हैं।

ओम थानवी ने किया पत्रिका का विमोचन
नई दिल्ली के हंसराज कालेज में आयोजित राष्ट्रीय भाषायी पत्रकारिता शिक्षा कार्यक्रम में देश भर से आये के प्रख्यात विद्वान, वरिष्ट पत्रकार, मीडिया शोधकतार्ओं के बीच सोशल विजन पत्रिका के सितम्बर-अक्टूबर अंक का लोकार्पण जनसत्ता के राष्ट्रीय संपादक ओम थानवी ने किया। समारोह में पत्रिका को ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए बहुत ही उपयोगी बताया। विकासात्मक पत्रकारिता को सही दिशा दी जिससे लोगों को सीधा लाभ मिलता है तथा आम जन के जीवन स्तर को उठाने में मदद मिलेगी। पत्रिका के सलाहकार संपादक प्रो. प्रदीप माथुर ने कहा कि देश में विकासात्मक पत्रिकारिता को बढ़ाने की आवश्यकता है। देश के प्रथम भाषायी पत्रकारिता शिक्षा संगोष्ठी में जुटे देश भर के शिक्षाविद वरिष्ठ पत्रकारों और जानी-मानी हस्तियों के बीच पत्रिका के संपादक संजय ने भाषायी पत्रकारिता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में प्रमुख रुप से डा गंगा प्रसाद विमल (जे एन यू), प्रो. आनन्द कुमार (जे एन यू), निधि कुलपति (एनडीटीवी न्यूज एंकर), दिनेश मिश्रा (इंडियन सोसायटी आफ आथर्स), हरि मोहन शर्मा, डॉ. रमा, प्रो. हरीश शर्मा, प्रो. वीरेन्द्र सिंह चैहान आदि ने प्रमुख रुप से अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रामजी लाल जांगिड तथा संचालन प्रो. प्रदीप माथुर ने किया।
हॉट कुक भी होगा स्वयंसेवी संगठनों के हवाले
आंगनवाड़ी केन्द्रों पर चल रही हॉट कुक्ड योजना के हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे स्वयंसेवी संगठनों को देने का फैसला किया है, लेकिन यह अधिकार जिलाधिकारी को दिया गया कि वह इस नियम को अपने यहां लागू करें या न करें। कई जिलों में इस योजना को स्वयंसेवी संगठनों को देने के लिए विज्ञापन भी निकाल दिये गये है। इस योजना में संगठनों का चयन किया जायेगा, जिनके पास इसका पर्याप्त अनुभव होगा। इस निर्णय का जहां आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों ने विरोध जताया है, वहीं केन्द्रों के हालात जानने वाले लोगों ने इसे अच्छा कदम बताया है। ज्यादातर कागज पर चलने वाले इस हॉड कुक्ड योजना में तीन से छ वर्ष के बच्चों को गरम खाने देने के लिए बनायी गयी थी, जिसमें प्रति बच्चे को सरकार द्वारा लगभग तीन रुपए दिया जाता है। लेकिन शायद ही किसी केन्द्र पर चूल्हा जलता हो।
यदि प्राइमरी स्कूल है तो वहां के मिड डे मिल से ज्यादातर आंगनवाड़ी केन्द्रों का काम चल जाता है। अधिकांश स्थानों पर आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा पैसा न आने की बात कहकर हाड कुक्ड नहीं बनाया जाता है। इस योजना में प्रतिदिन सोमवार एवं शनिवार को खिचड़ी बुधवार एवं शुक्रवार को लाई चना एवं गुण और मंगलवार एवं गुरूवार को दलिया दिया जाता है। इसके अलावा इन बच्चों को बुधवार एवं शुक्रवार को छोड़कर 50 ग्राम पुष्टाहार भी दिया जाता है। इसके लिए प्रतिमाह आंगनवाड़ी केन्द्रों पर तीन हजार से ज्यादा धनराशि भेजी जाती है, जो आंगनवाड़ी केन्द्रों पर आप के बच्चों के लिए खर्च की जानी होती है।
आशा कार्यकर्ता को मिलेगा भुगतान
सरकार लगातार आशाओं को गांव में विभिन्न योजनाओं से जोड़ते हुए वित्तिय लाभ देती है लेकिन अधिकांश आशाओं को इसका पता नहीं होता। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन को गांव के निचले स्तर तक ले जाने में आशाओं की भूमिका अहम होती जा रही है। हाल ही में सरकार द्वारा आदेश जारी करके आशाओं को दम्पत्तियों को परिवार नियोजन में सलाह देने उन्हें अपनाने के लिए और जागरूक करने के लिए प्रति दम्पत्ति 500-1000 तक दिये जायेंगे। दम्पत्ति यदि अपने परिवार में बच्चों के बीच अन्तर और परिवार सीमित रखते हैं तो इसके लिए आशाओं को इसका भुगतान किया जायेगा। इससे आशाओं की वित्तिय स्थिति ठीक होने की उम्मीद है।
नल लगवाने पर मानदेय
सभी गांवों को पेय जल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार 12 वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण पेय जल कार्यक्रम में प्रमुख रणनीतिक बदलाव लाने जा रही है। देश के अधिकतर हिस्सों में अति भूमिगत जल संग्रह की पृष्ठ भूमि में भूमिगत जल से सतही जल उपयोग की तरफ जाने पर जोर दिया जा रहा है। हैण्ड पंप के प्रयोग को कम करते हुए पाईप द्वारा जलापूर्ति पर ध्यान दिया जाएगा। आज 13 प्रतिशत परिवारों के कनेक्शन की तुलना में 2017 तक 35 प्रतिशत परिवारों को कनेक्शन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामवासियों को यह कनेक्शन लेने के प्रति उत्साहित करने के क्रम में सरकार ने इसे मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा से जोड़ा है। हाल में जारी एक आदेश में कहा गया है कि आशा कार्यकतार्ओं को यह कनेकशन लगवाने के लिए उत्साहित करने पर प्रति परिवार 75 का लाभ दिया जाएगा। राज्य राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम सहायता के अन्तर्गत आवंटित धनराशि का उपयोग कर सकते हैं।
निजी स्कूलों को मिलेगा 450 रुपये अनुदान
बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किया शासनादेश प्रदेश में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत मात्र 60 बच्चो को ही प्रवेश मिल सका लखनऊ शासन ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों की 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को प्रवेश देने के एवज में स्कूलों को की जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि तय कर दी है। गरीब बच्चों को प्रवेश देने वाले निजी स्कूलों को अब प्रति बच्चा 450 रुपये प्रति माह की दर से अनुदान दिया जाएगा।
एस एम सी का होगा प्रशिक्षण
स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को जागरूक करने के लिए जल्द ही मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों को ट्रेनिंग दी जायेगी। इस ट्रेनिंग में सदस्यों के अधिकारों एवं काम करने के बारे में बताया जायेगा। इस ट्रेनिंग के लिए सरकार काफी धन खर्च करेगी।
नगद भुगतान पर देना होगा शपथ पत्र
धान खरीद केन्द्रों पर 10 अक्टूबर से 28 फरवरी तक धान कर खरीदारी की जायेगी। सामान्य धान का समर्थन मूल्य 1310 रूपया और ग्रेड-ए धान का 1345 रूपया मूल्य निर्धारित किया गया है। किसानों को धान क्रय केन्द्रों पर जोत बही, खतौनी पहचान के लिए अपना फोटो पहचान पत्र दिखाना होगा। इस बार धान किसान को मण्डी समिति, मण्डी परिषद से लाइसेंस प्राप्त अढ़तिया कमीशन एजेन्ट के माध्यम से भी खरीद की जायेगी। खरीद का भुगतान आपके अकाउन्ट में हस्तांतरित कर दिया जायेगा। यदि आपका बैंक में खाता नहीं है तो अकाउन्ट पेयी चेक के माध्यम से भी दिया जायेगा जो 2 लाख रुपए से ज्यादा नहीं होगा।
20 प्रतिशत विधवाओं को नहीं मिल रही पेंशन
शासन ने अभी तक लगभग 20 फीसदी विधवाओं को पेंशन नहीं भेजा है। पिछले कई माह से पेंशन रूका हुआ था, लेकिन पेंशन का बजट आने के बाद 20 फीसदी बजट कम आया हैए जिससे काफी संख्या में हजारों विधवाओं को पेंशन नहीं मिल पायेगा। इससे अधिकारियों को जहां लाभार्थियों को समझाने में परेशानी होगा, वही यह बड़ी मुश्किल काम है। भदोही के जिला प्रोबेशन अधिकारी जवाहर प्रसाद ने बताया कि किसका पेंशन रोका जाय और किसको दिया जाय। हालांकि आने वाले दिनों में यह पेंशन आयेगा या नहीं, इसकी सूचना अधिकारियों को भी नहीं है।
68 हजार दुकान चला रहे 1100 लोग
प्रदेश में 68 हजार दवा की दुकानों को सिर्फ 11 सौ व्यक्तियों के चलाने का हैरतअंगेज मामला सामने आया है। कानून के अनुसार किसी भी दवा के दुकान को फार्माशष्ट डिग्री धारक चला सकता है। प्रदेश में 68 हजार दवा की दुकानों उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से चला रहे हैं। अलीगढ़ में केमिस्ट डगिस्ट्र एसोसिएशन की प्रदेशस्तरीय बैठक में संस्था के महामंत्री ने बताया कि प्रदेश में कुल 21676 फार्माशिष्ट ही उपलब्ध् हैं। जिनमें 90 फीसदी सरकारी सेवा या बड़ी फर्मों में काम करते हैं, इनमें से पांच फीसदी ही अपनी स्वयं की दुकान चला रहे हैं। बचे पांच फीसदी यानि 11 सौ फार्माशिष्ट के सहारे उत्तर प्रदेश की सारी दवा की दुकानें चला जा रही है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। 1940 में बने नियमों के अनुसार फार्माशिष्ट डिग्रीधारक ही दवा की दुकान चला सकता है।
फर्जी छात्र संख्या के बल पर शिक्षकों की नियुक्ति
शहर और रोड से सटे प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी छात्र संख्या दिखाकर शिक्षक अपनी नियुक्ति करा लेते थे। लेकिन जल्द ही इस पर रोक लग जायेगी। प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की संख्या का आधार अब एमडीएम खा रहे बच्चों की संख्या पर निर्भर करेगी। जितनी संख्या एमडीएम में होगी उतना ही विद्यालयों में छात्र माना जायेगा। एमडीएम में छात्रों की संख्या आईबीआरएस तकनीकि से रोज दर्ज होता है कि कितने बच्चों ने एमडीएम खाया। उसी आधार पर बच्चों की संख्या मानी जायेगी और नियुक्ति की जायेगी। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्राथमिक विद्यालयों में तीस बच्चों पर एक शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए।
रोजगार सेवकों को मिलेगा टेबलेट
रोजगार सेवकों को मिलेगा टेबलेट मनरेगा में काम करने वाले रोजगार सेवकों को अगले वर्ष तक अच्छे क्वालिटी का टैबलेट फैबलेट जो मोबाईल और कम्प्यूटर का मिला-जुला रूप होता है इसके लिए सरकार ने 12000 पये खर्च करने की अनुमति दी है। लगातार विभागों को सूचना तकनीकी से जोड़ने की कवायद के बीच मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों और कार्यस्थल पर डाटा इन्ट्री ना होने से काम में देरी होती थी इससे वे कार्यस्थल से ही डाटा भर सकेंगे और मजदूरों की काम की मांग काम का चुनाव आदि कर सकते हैं।
बड़े कर्जधारको का नाम नहीं बताएगा रिजर्व बैंक
मामूली लोन अदा न करने वाले कर्जधारकों के लिए सरकार बड़ी-बड़ी कार्यवाही करती है। उसका नाम अखबारों में छापवाने से लेकर जेल भेजने तक अतिशिघ्रता से कार्यवाही की जाती है। लेकिन बड़े बकायेदारों के नाम समाचार पत्रों में छपवाने के बजाय उनके नाम तक के खुलासे नहीं किए जाते हैं। एक अखबार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक से जब बड़े बकायेदारों की सूचना मांगी गयी तो अस्सी वर्ष पुराने एक कानून का हवाला देकर रिजर्व बैंक ने खुलासा करने से इनकार कर दिया। सूचनाधिकार में सौ बड़े बकायेदारों की सूचना मांगी गयी थी। जबकि इसी वर्ष मार्च में केन्द्रीय वित्त मंत्री लोकसभा में बताया था कि एक करोड़ से ज्यादा के 7 हजार 295 बकाएदार हैं। इन पर कुल 68,262 करोड़ रूपए बकाया है। आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि यह रकम पूरे देश में पौने चार करोड़ किसानों को दी गयी कर्ज माफी की रकम से ज्यादा है।
समस्या: कैसे करे ग्राम पंचायत निर्माण कार्य
ईंट और निर्माण सामग्री का दाम बाजार मूल्य पर करने की मांग ग्रामीण स्तर पर पंचायतें एक बड़ी समस्या से जुझ रही है। बाजार में ईंट का मूल्य लगभग छ: हजार रुपये है, वहीं अभी भी सरकारी स्तर पर इसका दर पांच हजार से अधिक है। प्रधान और सेक्रेटरी को निर्माण कार्य कराने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता हैए जहां उच्च अधिकारी काम को जल्द से जल्द पूरा करने का दबाव डालते हैं। ईट के दाम कम मिलने पर प्रधान और सेक्रेटरी किसी तरह से अन्य मदों में से बचाकर काम चलाते हैं इससे जहां काम की गुणवत्ता भी खराब हो रही है, वहीं चोरी को बढा़वा मिल रहा है प्रधान संघ ने जल्द से जल्द ईंट का निर्धारित रेट बढ़ाने की मांग की है।
बंद होनी चाहिए मनरेगा और मिड-डे मील: रामगोपाल
समाजवादी पार्टी के महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव का कहना है कि मनरेगा और मिड डे मील जैसी योजनाएं बंद होनी चाहिए। ये योजनाएं नाकारा बनाने वाली हैं। जैन मेले में आयोजित अखिल भारतीय शैक्षिक संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने बेसिक शिक्षा में सुधार की जरूरत बताते हुए शिक्षकों से जिम्मेदारी समझने का आह्वान किया। शिक्षा के उन्नयन विषय पर हुई गोष्ठी में बोलते हुए कहा कि प्रोफेसर रामगोपाल ने कहा कि बेसिक स्तर पर शिक्षा में सुधार की जरूरत है। राज्य में शिक्षकों की कमी है। प्राइमरी के शिक्षक अपने दायित्वों को समझें। उन्होंने मिड डे मील और मनरेगा योजनाओं को अनुपयोगी बताते हुए इन्हें बंद करने की मांग की। खाद्य सुरक्षा कानून को पैसे की बबार्दी बताया। उन्होंने कहा कि यह धन अन्य विकास योजनाओं में लगाया जा सकता है।
नए राशनकार्ड में आपकी पूरी जानकारी
प्रदेश में अब पुराने की जगह नये कार्ड जारी किये जा रहे हैं। ये आनलाइन मुद्रित किये जायेंगे। पहली बार कार्ड में गांव का नाम बैंक खाते का विवरण, फोटो पहचान पत्र मोबाइल नम्बर और परिवार के सभी सदस्यों की जन्मतिथि भी डाली जायेगी। आने वाले कुछ महीनों में खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद राशन न मिलने पर भत्ता दिये जाने की व्यवस्था है। कोटेदार की जगह सब्सिडी सीधा कार्ड धारक के खाते में ही आ सकती है। इसलिए बैंक खाते का पूर्ण विवरण, पास बुक की फोटो कॉपी भी नये राशन कार्ड के दौरान देनी होगी। इस दौरान अपात्रों के कार्ड भी निरस्त कर दिये जायेंगे।
क्या है क्लीन नोट पालिसी
आरबीआई ने भारतीय करेंसी को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए सात नवंबर 2001 को क्लीन नोट पालिसी लागू की थी। इसके तहत आरबीआई ने सभी बैंकों के निर्देश दिए हैं कि नोटों पर कुछ भी न लिखें। न ही उस पर मुहर लगाएं। नोटों की गड्डी में पिन न लगाएं। रिजर्व बैंक ने इसके लिए सभी बैंक से कहा गया है कि जनवरी के बाद इस तरह के नोटों को लेना बंद कर दे।
धान घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश
विंध्याचल मंडल में वर्ष 2011-12 में धान खरीद में आठ करोड़ रुपये घोटाले का खुलासा हुआ है। ऐसे में एमडी यूपी एग्रो ने न सिर्फ तीनों जिले में खरीद केंद्र खोलने पर रोक लगा दी है बल्कि मामले की उच्च स्तरीय जांच की भी सिफारिश की गई है। भदोही, मीरजापुर और सोनभद्र में चावल बनाने के लिए मिल मालिकों को धान दिया गया। उससे प्राप्ति रसीद भी ली गई, इसके बाद जब संस्था के लोग चावल लेने गए तो मिलरों ने प्राप्ति रसीद पर बने हस्ताक्षर को फर्जी करार देते हुए चावल देने से इनकार कर दिया। इस मामले में क्षेत्रीय प्रबंधक सहित तीन केंद्र प्रभारी निलंबित किए जा चुके हैं। घोटाले में भदोही, मीरजापुर और सोनभद्र जिले में 2700 एमटी चावल गटकने की बात सामने आई है। किसानों से धान और गेहूं खरीद करने के लिए विंध्याचल मंडल में एग्रो के चौदह खरीद केंद्र संचालित थे। वर्ष 2011-12 और वर्ष 2012-13 में संचालित खरीद केंद्रों पर 27 हजार कुंतल धान खरीदा गया था। इसकी कीमत 8 करोड़ बतायी जाती है। एग्रो के एमडी प्रभात सिन्हा ने बताया कि विंध्याचल मंडल में 2700 एमटी चावल का पता नहीं लग पा रहा है। इसकी कीमत करीब आठ करोड़ हैं। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर क्षेत्रीय प्रबंधक और तीन केन्द्र प्रभारियों को निलंबित कर दिया गया है।
प्राथमिक स्कूल में टी ई टी मेरिट से होगी भर्ती
हाईकोर्ट ने प्रदेश में प्राथमिक स्कूलों में 72825 शिक्षकों की भर्ती में टीईटी के मेरिट के आधार पर करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। कोर्ट ने 30 नवम्बर 2011 के विज्ञापन को सही माना है। इस नियुक्ति प्रक्रिया को 31 मार्च 2014 तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है। अभी शिक्षा अधिकार कानून के तहत 258239 पदों पर भर्ती होगी। इसके अनुसार 118267 और शिक्षकों की जरूरत होगी। हर 3 वर्ष में 36 हजार शिक्षक रिटायर हो जाते हैं।
सफाई कर्मचारी भर्ती
पूरे उत्तर प्रदेश के प्रत्येक राजस्व ग्रामों में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति बसपा सरकार के कार्यकाल में किया गया था। भदोही जनपद में 1279 पदों के लिए भर्ती के दौरान गड़बड़ी पाये जाने के बाद प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थी। तबसे लेकर सफाई कर्मचारी के लिए अभ्यर्थियों ने लगातार इस पद पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करके भर्ती की मांग कर रहे हैं। इसके लिए सफाई कर्मचारी भर्ती के अध्यक्ष. चन्दूलाल चन्दाकर के नेतृत्व में आन्दोलन चलाया जा रहा है। अभी हाल ही में इलाहाबद हाईकोर्ट के एक निर्णय के पश्चात कर्मचारियों की भर्ती राज्य सरकार से तीन महीने के अन्दर निर्णय लेने के लिए कहा गया है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा इस भर्ती के संबंध में स्पष्ट रूप से कार्यवाही करने की बाध्यता आ गई है। कोर्ट ने कहा भर्ती निरस्त करने का कोई कारण नहीं है। इस भर्ती के लिए पहले विज्ञापन के दौरान लगभग 5 हजार लोगों ने आवेदन किया इसके पश्चात दो बार और विज्ञापन मांगे गये जिसमें 12 लाख से अधिक आवेदन पत्र पंचायत विभाग में आये जिन पर अभयर्थियों को करोड़ों रुपए खर्च करना पड़ा। ऐसे में नियुक्ति किस विज्ञापन के आधार पर की जायेगी। यह सरकार के लिए बड़ी मुश्किल का काम है। जहां प्रथम बार आवेदित अभयर्थी नियुक्ति में सिर्फ उन्हें शामिल करने की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में राज्य सरकार क्या प्रक्रिया अपनाती है और कोर्ट का क्या रूख होता है इस पर निर्भर करेगा। वहीं उत्तर प्रदेश में के नगर निकायों में अखिलेश सरकार ने जल्द ही 40 हजार सफाई कर्मचारियों को नियुक्त करने का फैसला किया है।
खोले जायेगें 9830 आंगनबाड़ी केन्द्र, होंगी हजारों भर्तियां
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 9830 आंगनबाड़ी केन्द्रों की कमी हैं। इसके लिए सरकार ने प्रस्ताव बनाकर केन्द्र सरकार को भेजा है वहां से स्वीकृति होने के बाद इन केन्द्रों आंगनबाड़ी कार्यकत्री और सहायिका की नियुक्ति की जायेगी केन्द्र सरकार ने मांग के आधार पर आंगनबाड़ी खोलने की योजना चलायी थी, इसे उत्तर प्रदेश सरकार ने विभिन्न जिलों में आंगनबाड़ी केन्द्र और मिनी केन्द्र खोलने के प्रस्ताव बाल विकास पुष्टाहार निदेशालय ने 50 जिलों के 9830 आंगनबाड़ी व मिनी आंगनबाड़ी निश्चित किए हैं। इन केन्द्रों को खोलने की मंजूरी केन्द्र सरकार से मांगी है। इनमें सबसे ज्यादा बरैली 1503 आंगनबाड़ी और सबसे कम बिजनौर में एक आंगनबाड़ी केन्द्र खोलने का प्रस्ताव भेजा गया है बाल विकास पुष्टाहार के निदेशक ने बताया कि केन्द्र की स्वीकृति मिलने के बाद यहां आंगनबाड़ी केन्द्र खोले जायेंगे।
कहां कितने आंगनबाड़ी केन्द्र खोले जायेंगे
गौतम बुद्ध नगर 120, लखनउ 184, मुरादाबाद 76, सीतापुर 35, हरदोई 922, इलाहाबाद 1089, सोनभाद्र 101, बांदा 374, भादोही 207, मिजार्पुर 30, चन्दौली 3, कौशाम्बी 394, मउ 103, महोबा 50, उन्नाव 233, मुजफरनगर 65, आगरा 352, बलिया 13, रामपुर 88, मैनपुरी 302, अमरोहा 487, बरैली 1503, ललितपुर 34, अम्बेडकर नगर 145, संत कबीर नगर 35, बस्ती 271, कुशीनगर 88, फतेहपुर 78, मेरठ 304, बागपत 148, बारांबंकी 37, चित्रकूट 101, बिजनौर 1, कानपुर देहात 26, अमेठी 7, रायबरेली 32, फरूखाबाद 30, फैजाबाद 112, सहारनपुर 157, औरैया 6, मथुरा 2, देवरिया 171, इटांवा 61, जौनपुर 143, झांसी 281, हाथरस 281 केन्द्र खोले जायेंगे।
मनरेगा मे होगी भर्तियां
मनरेगा में जॉबकार्ड धारकों को सही समय पर मजदूरी मिलने में सबसे ज्यादा दिक्कतें समय पर एम. बी. न हो पाने से होता रहता है। पंचायतों को योजना बनाना, स्टीमेट बनाना, काम की पहचान करना प्रति सप्ताह हो जाना चाहिए, लेकिन तकनीकी सहायकों की कमी के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा हैए इसलिए केन्द्र सरकार ने कुछ कर्मचारियों को कोर स्टाफ घोषित किया है और राज्यों से कहा है कि 31 दिसम्बर 2013 से पहले इनकी नियुक्ति हो जानी चाहिए। अपने आदेश में कहा है कि प्रति पांच गांवों पर एक तकनीकी सहायक की नियुक्ति होनी चाहिए। यदि ये डिप्लोमा होल्डर नहीं मिलते हैं तो राज्य सरकार किसी अच्छे स्थानीय मनरेगा मजदूर जो कक्षा दस पास होए उसे प्रशिक्षित करके तकनीकी सहायक का काम ले सकती है। वहीं हर ब्लाक में एक जूनियर इंजीनियर सिविल डिग्री धारक रखा जायेगा, जो ब्लाक पर तकनीकी स्वीकृतियां देगा। यदि अच्छे कर्मचारी विभाग में नहीं मिलते हैं उसे संविदा पर भी रखा जा सकता है। वहीं कार्य स्थल पर 100 मजदूरों पर एक मेठ की भी नियुक्ति की जायेगी। तमाम गांवों एवं ब्लाकों में पद खाली पड़े हैं, ऐसे में इस आदेश के बाद बड़ी संख्या में नियुक्तियां की जायेगी।
ग्रामीण विकास के पाठ्यक्रम से रोजगार की सम्भावना
ग्रामीण भारत के विकास के लिए सरकार निरंतर अपने बजट में व्यापक वृद्धि कर रही है। इस कारण इस क्षेत्र में विभिन्न स्तरों पर रोजगार के अवसर भी बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। रोजगार के रूप में गांव के विकास को इसलिए भी महत्व दिया जा रहा है। क्योंकि यह एक व्यापक क्षेत्र है तथा इस क्षेत्र में अवसर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। रूरल डेवलपमेंट के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए 12वीं के बाद बीए, एमए इत्यादि के बाद सीधे-तौर पर ग्रामीण विकास के लिए काम किया जा सकता है लेकिन करियर को और बेहतर बनाने के लिए जरूरी है कि बैचलर आफ सोशल वर्क या मास्टर आफ सोशल वर्क का कोर्स किया जाए। इन कोर्सों में दाखिले के लिए हर संस्थान और यूनिवर्सिटीज में दाखिला लेने के अगल-अलग नियम व शर्तें हैं। देशभर में विभिन्न शैक्षणिक संस्थान रूरल डेवलपमेंट जैसे प्रोफेशनल कोर्स करा रहे हैं, जिसके चलते देश में प्रशिक्षित रूरल डेवलपमेंट प्रोफेशनल्स बड़ी संख्या में तैयार हो रहे हैं।
कैसे बनती है धूप से बिजली?
राजेश यादव
सिद्धान्त देखें तो सूर्य का प्रकाश भी एक उर्जा है और विद्युत भी एक उर्जा है। जरुरत इस बात की है किम एक उर्जा को दूसरे में कैसे परिवर्तित किया जाये सच तो यह है कि पृथ्वी के धरातल पर अरने वाले प्रकाश में निहित समस्त उर्जा को अगर विद्युत में बदल दिया जाय तो संसार की बिजली संबंधी समस्त आवश्यकता पूर्ण हो जायेगी। सूर्य प्रकाश में जो उर्जा होती है वह छोटे-छोटे विद्युत कणों जिन्हें इलेक्ट्रान्स कहते हैं के रुप में होती है। वस्तुत: इलेक्ट्रान्स का प्रवाह ही विद्युत है। अगर सूर्य प्रकाश सिलिकॉन पर पड़े तो उसके विद्युत कणों को एकत्र किया जा सकता है क्योंकि सिलिकॉन की यह विशेषता है कि उसमें होकर विद्युत प्रवाह केवल एक तरफ से ही हो सकता है। इसी तथ्य की पृष्ठभूमि में 1839 में बैकुरल नामक एक वैज्ञानिक ने फोटोवोल्टेइक सिलिकॉन थिन फिल्म सैल बनाकर सौर उर्जा में बदलनें की एक तकनीक ईजाद की। इस तकनीक में सिलिकॉन की एक अत्यंत पतली पर्त गैस के रुप में कांच के शीट पर फैलाई जाती है तथा इस पर ऋणात्मक तथा धनात्मक धु्रव बनाकर 50 वाट की बैटरी का सैल तैयार कर लिया जाता है। इन्हें परस्पर जोड़कर 400 वाट की एक इकाई तैयार की जाती है।जैसे-जैसे ये इकाईयां तैयार हो जाती हैं इन्हें जोड़कर अधिक क्षमता का संयत्र 50-100 मेगावाट भी बनाया जा सकता है। एक दूसरी विधि भी है। पैराबोलिक डिस कलैक्टर्स जिनमें कांच के रिफ्लेक्टर्स लगे होते हैं उन्हें सूर्य के सामने इस प्रकार घुमाया जाता है कि सूर्य प्रकाश सीधी रिफ्लेक्टर्स पर हो। सारे रिफ्लेक्टर्स प्रकाश यानी उर्जा को एक निश्चित क्षेत्र में केन्द्रित करते हैं। इस प्रकार से इकट्ठी की गयी सौर उर्जा से पानी को वाष्प में बदलकर टरबाईन घुमाने और बिजली बनाने के काम में लिया जाता है।
संगीन मामले में प्राथिमिकी दर्ज न करने पर नपेगी पुलिस
विनय, महाराजगंज
संज्ञेय मामलों में पुलिस को मामला दर्ज करना होगा, कोर्ट ने कहा है कि पुलिस मामला दर्ज करने के बाद ही जांच करे। पुलिस प्रारंभिक जांच के नाम पर मामला दर्ज करने से मना नहीं कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी को राहत देते हुए पुलिस विभाग को आदेश दिया है कि संगीन मामलों को अपने रजिस्टर में तुरंत दर्ज करें नहीं तो संबंधित थानेदार के खिलाफ कार्यवाही होगी। सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की एक पीठ ने निर्णय देते हुए कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने का मतलब गिरफ्तारी नहीं है। यह मानना कि मामला दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी अवश्य होगी यह एक काल्पनिक और बेवजह का डर है। जो भी आरोपी हो उसे अग्रिम जमानत देनी चाहिए। यदि पुलिस अधिकारी गलत गिरफ्तारी करता है तो उसके खिलाफ धारा 166 के तहत कार्यवाही की जायेगी। कुछ मामलों में कोर्ट ने कहा है कि इसमें पुलिस जांच कर सकती है। ये मामले मेडिकल में लापरवाही, वैवाहिक विवाद, पैसे का लेन-देन, तीन माह से पुराने अपराधों की सूचना और जनसेवकों पर भ्रष्टाचार के मामले पर प्रारंभिक पूछताछ कर सकती है। लेकिन यह पूछताछ सात दिन के अंदर करके यह फैसला लेना होगा कि एफ आई आर दर्ज किया जाय कि नहीं। इसकी पूरी जानकारी जनरल डायरी में भी दर्ज की जायेगी। ज्यादातर देखा जाता है कि पुलिस प्रशासन मामलों को दर्ज करने में कोताही बरतती है। इसका प्रमुख कारण होता है मामला दर्ज होने के बाद अपराध का ग्राफ ज्यादा दिखायी देने लगता है। मामले का खुलासा करना भी जरूरी हो जाता है।
क्या होता है एफ आई आर?
संज्ञेय अपराध ऐसा मामला भी कह सकते हैं जिसमें पुलिस बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकती है। ऐसे मामलों में कोर्ट से जमानत मिलना उसके विवेक पर निर्भर करती है। जबकि असंज्ञेय अपराध ऐसे अपराध होते हैं जिसमें गिरफ्तारी के लिए पुलिस को कोर्ट से वारंट लेना इसमें जमानत पाना अधिकार होता है। आम जन की भाषा में एफ आई आर गंभीर किस्म के अपराध होते हैं ऐसे अपराध से सामाजिक खतरे होते हैं जबकि एनसीआर कम गंभीर किस्म के अपराध होते हैं। कानूनी भाषा में संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध दण्ड प्रक्रिया संहिता प्रथम अनुसूची में दिया गया है जिसमें बताया गया है कि कौन से अपराध किस श्रेणी के हैं। इसी से हमें पता चलता है कि कौन से अपराध संज्ञेय कौन से असंज्ञेय कौन से जमानती और कौन से अजमानती होते हैं। इसके लिए बनायी गयी एक कमेटी जस्टिस मलीमथ की रिपोर्ट कहती है कि देश में पिछले वर्ष साठ लाख एफआईआर दर्ज हुयी लेकिन उतने ही मामले नहीं दर्ज होते हैं। गरीब और ग्रामीण लोगों का एफ आई आर दर्ज किए बगैर टाल दिया जाता है जिससे गरीबों और पीड़ितों को न्याय मिलने में परेशानी होती है। लोगों का कानून पर से सम्मान कम होता है।
कमेटी जस्टिस मलीमथ की रिपोर्ट कहती है कि देश में पिछले वर्ष साठ लाख एफआई आर दर्ज हुयी लेकिन उतने ही मामले नहीं दर्ज होते हैं। गरीब और ग्रामीण लोगों का एफआईआर दर्ज किए बगैर टाल दिया जाता है।
मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना से बनिये स्वावलंबी
राजेश कुशवाहा
इस कालम में हम आपको उन योजनाओं की जानकारी देते हैं जिसका लाभ लेकर आप अपने व्यापार की शुरूआत खुद कर सकते हैं।
खादी ग्रामोद्योग विभाग द्वारा संचालित इस योजना में ब्याज मुक्त ऋण मिलता है बहुत सारे उद्यमी इस योजना का लाभ लेकर अपना उद्योग स्थापित कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना पिछले अंक में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के बारें में बताया गया था इस अंक में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के बारे में जानकारी दी जा रही है। उस योजना से थोड़ा सा भिन्न है। जहां प्रधानमंत्री रोजगार योजना में 35 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती थी वहीं इस योजना में ब्याज पर छूट दी जाती है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में लगायी जा सकती है।
ग्रामोद्योग क्या है?
इस योजना का लाभ ऐसे क्षेत्रों में मिलेगा जो नगर और नगर पंचायत से बाहर हों ग्रामीण क्षेत्र हों। जहां की आबादी 20 हजार से अधिक न हो।
कौन-कौन से उद्योग शामिल हैं?
इस योजना में बहुत सारे उद्योग शामिल हैं। कुछ नकारात्मक उद्योगों को छोड़कर इस योजना में सभी प्रकार के उद्योग लगाये जा सकते हैं जैसे-खनिज आधारित उद्योग, वन आधारित उद्योग, कृषि आधारित और खाद्य उद्योग, बहुलक और रसायन आधारित उद्योग, इंजीनियरिंर्ग, गैर परंपरागत ऊर्जा, वस्त्र उद्योग खादी को छोड़कर, सेवा उद्योग आदि शामिल हैं।
योजना की पात्रता-
यह योजना ग्रामीण क्षेत्र की बेरोजगार नवयुवकों व नवयुवतियों में परंपरागत कारीगरों को दी जाती है। जिनकी उम्र 18-50 साल के बीच होनी चाहिए और लाभार्थी शिक्षित होना चाहिए। योजना में शासन द्वारा 10 लाख रुपए तक की ऋण स्वीकृत की जाती है।
अनुदान
योजना में बैंकों द्वारा दिए गए ऋण पर अनुदान दिया जाता है। योजना आरक्षित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ावर्ग, अल्पसंख्यक, विकलांग, भूतपूर्व सैनिक व महिलाओं को बिना ब्याज के ऋण दिया जाता है। वहीं इसके अलावा अन्य वर्गों सामान्य लाभार्थी को 4 प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया जाता है। इस योजना में बैंकों को बचे ब्याज का पैसा विभाग द्वानान उपलब्ध कराया जाता है। ब्याज पर छूट तभी मिलती है जब इकाई काम कर रही हो। योजना में यह छूट 5 वर्षों तक मिलती है। 5 वर्षों तक लाभार्थी इस छूट का लाभ उठा सकता है।
ऋण के लिए लगने वाले कागजात
1. दो फोटो
2. निवास प्रमाण पत्र ष्ष्ग्राम प्रधान सेष्ष्
3. शैक्षिक योग्यता का प्रमाण
4. मतदाता पहचान पत्र पेन कार्ड
5. प्रोजेक्ट रिपोर्ट
6. सामान का कोटेशन
7. जगह का नक्शा
8. सौ रुपए के स्टाम्प पेपर पर किरायानामा या स्वंय की सम्पत्ति हो तो प्रमाण।
कहां करें सम्पर्क
खादी ग्रामोद्योग कार्यालय से फार्म और जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे सम्बन्धी और कोई जानकारी चाहिए हमारे हेल्प लेने नम्बर 8188887200 पर फोन करे अथवा योजना का फार्म पत्रिका के वेबसाइट www.socialvision.in से डाउनलोड कर सकते है।
मनरेगा: अब जरुरत है बदलाव की
वैसे तो केंद्र सरकार ने पूरे देश में लोगों को रोजगार की गारंटी देने के लिए मनरेगा की शुरूआत की थी लेकिन इसकी क्रियान्वयन और इसकी नीतियों के बदलाव पर ध्यान नहीं दिया गया।
योजना में सबसे बड़ी बांधा मजदूरी एवं सामग्री की बढ़ती महंगाई में यह अनुपात बनाये रखना। 60 और 40 फीसदी अनुपात के बजाय स्थायी विकास की नींव रखी जानी चाहिए क्योंकि गांवों में कच्चे कामों की उपलब्धता कम होती जा रही है।
भदोही के मुख्य विकास अधिकारी इन्द्र भूषण द्विवेदी जी के अनुसार 2005 के पहले महानगरों की तरफ जाने वाली ट्रेनों में खचा-खच भीड़ भरी रहती थी लेकिन अब यह भीड़ दिखाई नहीं देती यह मनरेगा का ही असर है। लेकिन 2005 के बाद इन आठ सालो में इस योजना में कई खामियां सामने निकल कर आयीं हैं। जिससे योजना में ग्रामीण की भागीदारी कम होती जा रही है। सरकार ने काम देने की गारंटी के साथ-साथ गांवों में सम्पत्तियों के सृजन का भी दावा किया था लेकिन यह हद तक नहीं हो सका। वहीं योजना इस बात पर आधारित थी कि मजदूर स्वयं काम मांगने आयेंगे लेकिन जागरूकता के अभाव में ग्रामीण स्तर पर यह कारगर साबित नहीं हो पाया।
इस योजना में सबसे बड़ी बांधा मजदूरी एवं सामग्री की बढ़ती महंगाई में यह अनुपात बनाये रखना। इस संबंध में ग्रामसभा अस्ती के प्रधान बनारसी यादव के अनुसार 60 और 40 फीसदी अनुपात के बजाय स्थायी विकास की नींव रखी जानी चाहिए क्योंकि गांवों में कच्चे कामों की उपलब्धता कम होती जा रही है। उनका मानना है कि महंगाई के अनुसार सामग्री का अनुपात बढ़ाया जाना चाहिए।
2005 से लेकर अब तक बीते आठ सालों में सामग्री का दाम तीन गुना अधिक बढ़ गया है लेकिन मजदूरी सौ रुपए से बढ़कर 142 रुपए ही हो पायी है। कई जनपदों के जिलाधिकारी रहे और मनरेगा रास्ट्रीय पुरस्कार
प्राप्त कर चुके सुरेन्द्र सिंह का भी मानना है की मनरेगा के अनुपात में बदलाव होना चाहिए। वंही जौनपुर जनपद के सुरेरी गांव के उच्च शिक्षित प्रधान डा. सुभाष चन्द्र वर्मा का मानना है कि मनरेगा में मजदूरी बढ़नी चाहिए। जैसे-जैसे गांवों में खेती का काम बढ़ता जाता है वैसे ही मनरेगा में मजदूरों का मिलना कम होता जाता है। ऐसे में मनरेगा में काम करने के लिए मजदूरों की कमी लगभग 6 महीनों तक बनी रहती है जिसके कारण काम में देरी होती रहती है। उन्होनें कहां कि ग्रामसभा को त्वरित धनराशि उपलब्ध कराया जाना चाहिये और ग्राम पंचायतों को निर्धारित समय सीमा में इस धनराशि को खर्च करने की पाबंदी होनी चाहिये।
ग्राम प्रधान मुन्ना सिंह का मानना है कि ग्रामीण अंचल में सभी विभागों को अपना काम मनरेगा के मजदूरों द्वारा ही कराया जाना चाहिए। अभी भी ठेकेदारी वालों कामों में बाहरी मजदूर लगाये जाते हैं। मनरेगा में जॉब कार्ड धारकों के 100 दिन के रोजगार को बढ़ाकर 150 दिन किया जाना चाहिए। भदोही जनपद के ग्राम पंचायत सचिव संघ के अध्यक्ष रुपेश का कहना है कि जॉब कार्ड धारकों में से बहुत से लोग मनरेगा में काम नहीं करना चाहते हैं और जो लोग काम करना चाहते हैं उनके बीच सौ दिन की बाध्यता घर में झगड़े का कारण भी बनता जा रहा है। जिस घर में कई लोग काम करने वाले हैं वो ज्यादा दिनों के लिये रोजगार की मांग करते हैं और आपस में झगड़ा कर लेते हैं। ऐसे भी कई मामले सामने आये हैं जिसमें पत्नी ने पति के खाते में भेजने से मना कर दिया है और पति ने पत्नी के खाते में पैसा भेजने से मना कर दिया है। ग्राम पंचायत संघ जौनपुर के अध्यक्ष डॉ प्रदीप सिंह का मानना है की 89 से जे आर वाई योजना से कच्चे कार्य हो रहे है इसलिए कच्चे कार्य कम हो गए है। मनरेगा के कार्यो में एक्ट के अनुसार यह मांग पर आधारित योजना थी लेकिन अब इसे लक्ष्य आधारित योजना बना दी गयी है। लक्ष्य के काम में मजदूरी कम होने से मजदूर काम करने में उत्साह नहीं दिखाते हैं और इसतरह की समस्या शहर से सटे ब्लाकों में आम बात है।
योजना नये कामों मे मिट्टी के साथ खड़ंजें कच्ची नाली के साथ पक्की नाली का भी प्रावधान होना चाहिए। संत रविदास नगर के प्रधान गोपाल का कहना है कि इस योजना के क्रियान्वन में सबसे बड़ी समस्या गांवों में ज्यादातर जमीनों का झगडे में होना है। इसके लिए ग्राम पंचायतों को राजस्व विभाग पर आश्रित होना पड़ता है। जैसे ही कोई काम किसी ग्राम समाज की जमीन पर कराने की स्वीकृति मिल जाती है वहीं गांव के दो चार व्यक्ति खड़े होकर विवाद पैदा कर देते हैं। ऐसे मामलों का त्वरित निस्तारण होना चाहिए। गांवों में 80 फीसदी खलिहान चारागाह अतिक्रमण से घिरे हैं राजस्व एवं पुलिस का सहयोग न मिलने से कार्य में काफी समय लग जाता है। जनपद के जिला विकास अधिकारी एस के श्रीवास्तव ने बताया कि शहर के किनारे के गांवों में यह समस्या ज्यादा है। वहां कच्चे कामों की कमी रहती है क्योंकि काफी विकास शहर के अनुरूप हो चुका होता है। ग्रामीण विकास योजना के परियोजना निदेशक दिनेश प्रसाद ने कहा कि यह योजना मांग पर आधारित है लेकिन अभी इतनी जागरूकता नहीं आ पायी है। श्री प्रसाद का कहना है कि काम की मांग लिखित रूप से करनी चाहिए और उसकी रसीद भी ले लेनी चाहिए तभी उसके नाम से मस्टर रोल निकाला जा सकेगा। दिल्ली से सटे नोएडा में मनरेगा की स्थिति और भी खराब है।
जहां के तीन तहसील पूरी तरह से शहर बन चुके हैं वहां के कामगारों को आसपास बेहतर मजदूरी मिल जाती है। मनरेगा में काम करने वालों की संख्या बहुत कम है। वहां के ग्राम विकास विभाग से जुड़े वरिष्ट अधिकारी इस योजना के क्रियानयन बजट खर्च न होने से हमेशा परेशान रहते है। गौतम बुद्ध नगर के मुख्य विकास अधिकारी आर पी मिश्रा ने बताया कि जनपद के दो तिहाई हिस्से शहर में तबदील हो चुके हैं जिससे मजदूरों को काम उद्योग-कारखानों में आसानी से काम मिल जाता है और जाब कार्ड धारक मनरेगा में काम करने से मना कर देते हैं।
योजना को बेहतर बनाने के लिए अब इसमें संशोधन जरूरी है योजना में आ रही जमीनी दिक्कतों को दूर करते हुए स्थाई विकास को महत्व दिया जाना चाहिए तभी राष्ट्रीय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। भदोही से महेंद्र मौर्या जौनपुर से ज्ञानप्रकाश के साथ
सोनभद्र से विजय, योगेंद्र मौर्या, सौरभ, किशोर चंद्र, राजेश विन्द
समय से भुगतान न करने पर भरने पड़ेगें जेब से पैसे
यदि काम के बाद पंद्रह दिन तक भुगतान नहीं हुआ तो 16 वें दिन कामगारों को कुल बकाया धनराशि का 25 फीसदी अधिक भुगतान करना जरूरी कर दिया गया है। अधिक भुगतान की यह रकम केंद्र या राज्य सरकार नहीं बल्कि उस अफसर को देनी होगी जिसकी वजह से भुगतान में देरी हुई है। देश में इस तरह के गंभीर नियम से अधिकारियो की जबाबदेही तय करना आसान हो जाएगा।
मिजार्पुर जिले के हलिया ब्लाक के रमेश पिछले एक माह से बैंक का चक्कर लगा रहे हैं कि उनका मजदूरी का पैसा खाते में आया कि नहीं। अधिकारी और प्रधान भी कोई समाधान नहीं कर रहें हैं। वहीं महाराजगंज के सुरेश भी इसी तरह की समस्या से परेशान हैं। अधिकारियों की कोई जवाबदेही न होने से मस्टर रोल बंद होने के बाद भी मजदूरों के खाते में मजदूरी नहीं आती है। अब ऐसा करना उनके लिए भारी पड़ सकता है मनरेगा के नए नियम ऐसे अधिकारियो की जेब खाली कर सकती है। मजदूरों लिए एक अच्छी खबर है कि मजदूरी अब समय से मिलेगी और भुगतान में देरी करने वाले अफसरों की अब खैर नहीं है। ऐसे अफसरों के सेलरी से सरकार पैसे काटेगी। इसी माह भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अपने आदेश जारी करके मजदूरों की समस्या का समाधान कर दिया है और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय कर दी है की मस्टर रोल बंद होने के बाद पन्द्रह दिन के अंदर मजदूरों का भुगतान करना होगा। नहीं तो बकाया धन का 25 फीसदी से जोड़ कर भुगतान करना होगा।यदि ये देरी 30 दिन से ज्यादा होगी तो बकाया भुगतान का पचास फीसदी जोड़कर भुगतान करना होगा इससे बचना भी मुश्किल होगा क्योंकि कम्प्यूटर इसकी गणना खुदबखुद कर लेगा। मंत्रालय ने इस तरह की व्यव्स्था करने का आदेश राज्यों को जारी कर दिया है इसके लिए मनरेगा के साफटवेयर में भी बदलाव किया जायेगा जिससे देरी करने वाले अधिकारियों का पता चल सके और भुगतान मजदूरों के खाते में समय पर जा सके। देश में इस तरह के कानूनी नियमों का अभाव है जिसमें देरी करने पर अधिकारियों को भुगतान अपने जेब से करना होगा। इससे उनके लिए समय सीमा में करना जरूरी हो जायेगा।
इसके लिए निम्न प्रक्रियाएं होगी
बयान
मस्टर रोल बंद होने के बाद मजदूरो के भुगतान की कई प्रक्रियाएं होती है। मनरेगा के 2013 के गाइड लाइन में किस कर्मचारी को कितने दिन में काम करना है राज्यों को इसी आधार पर जवाबदेही सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है। कार्य शुरू होने के छठें दिन मस्टर रोल बंद करना। आठवें दिन मस्टर रोल को माप पुस्तिका में दर्ज करना। नवे दशवें दिन मस्टर रोल की एमआईएस फीडिंग करना एंव भुगतान आदेश तैयार करना। ग्याहरवे-बारहवे दिन ब्लाक डाकघर को आदेश देना इनफार्मेशन स्लीप तैयार करना और गांव डाकघर और बैंक को भुगतान का आदेश जारी करना।
केन्दीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने मनरेगा में मजदूरों को भुगतान मे हो रही देरी के बारे में राज्यों को पत्र लिख कर कहा है कि देश भर में कुल भुगतान का लगभग पच्चीस फीसदी भुगतान मजदूरों को देर में मिलती है और एक सौ पच्चीस करोड़ का भुगतान 90 दिनों से भी ज्यादा देर में होती है। उन्होंने कहा है कि मंत्रालय ने मनरेगा में संसोधन करके भुगतान में हो रही विलंब के लिए पर्याप्त मुआवजा देने के साथ देर करने वाले कर्मचारी अधिकारी की जवाबदेही भी तय हो जायेगी। पन्द्रह दिन के अंदर भुगतान न करने वाले कर्मचारी से मुआवजा भी वसूल किया जायेगा ।
-जयराम रमेश
केन्दीय ग्रामीण विकास मंत्री
मनरेगा में जुड़े 30 नए काम
मनरेगा अब छोटे किसान के दरवाजे
महेन्द्र मौर्या
मनरेगा के अन्दर केन्द्र सरकार लगातार नये काम जोड़ती जा रही है। जिसमें मजदूरी एवं सामान के अनुपात में भी फेरबदल किया जा रहा है। जहां पहले 60 और 40 फीसदी अनुपात रखा गया था वहां अब नये कामों में इस अनुपात को कम ज्यादा किया गया है। जिससे ग्राम पंचायतों को कार्य कराने में आसानी हो। मनरेगा से जुड़े नये कामों में बहुत सारे ऐसे काम है जो थोड़ी सी सूझबूझ से कराने पर गांवों में लाखों रुपए का काम आसानी से कराया जा सकता है। मनरेगा में जुड़े नये कामों में ईंट बनाने, आंगनवाडी केन्द्र, सोख्ता, खेल का मैदान आदि बहुत से ऐसे नये काम हैं जो कराये जा सकते हैं। इनके बारे में नीचे दिया गया है।
कंटूर ट्रेंच या समान गहराई वाली खाई, समोच्च बांध, पत्थर के रोक बांध, बोल्डर, चैक, बेलनाकार संरचना, भूमिगत बांध, मिट्टी के बांध, रोक बांध तथा स्प्रिंग शेड विकास सहित जल संरक्षण एवं जल संचय, सूखे से बचाव के लिए वनरोपण और वृक्षारोपण, सिंचाई के लिए सूक्ष्म और लघु सिंचाई परियोजनाएं सहित नहरों का निर्माण, परिवारों द्वारा स्वामित्वाधीन भूमि पर सिंचाई सुविधाएं, खेत में बनाए गए तालाब, बागवानी, पौधरोपण, खेत बांध और भूमि विकास का प्रावधान, परम्परागत जल निकायों के पुर्नजीवीकरण सहित जलाशयों की गाद निकालना, भूमि विकास, बाढ़ नियंत्रण एवं सुरक्षा परियोजनाएं जिनमें जलभराव से ग्रस्त इलाकों में पानी की निकासी, बाढ़ नालों को गहरा करना और मरम्मत करना, चैर नवीनीकरण, तटीय संरक्षण के लिए स्टोर्मवाटर ड्रेनों का निर्माण शामिल हैं, ग्रामों के भीतर जहां भी आवश्यक हो, पुलियों और सड़कों की व्यवस्था सहित बारहमासी सड़क संपर्कता मुहैया कराने के लिए ग्रामीण सड़क संपर्कता, ब्लॉक स्तर पर ज्ञान संसाधन केन्द्र के रूप में भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र तथा ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम पंचायत भवन का निर्माण, कृषि से संबंधित कार्य जैसे कि एन ए डी ई पी कम्पोस्टिंग, वर्मी-कम्पोस्टिंग, तरल-जैव खाद, पशुधन संबंधी कार्य जैसे कि मुगीर्पालन शेल्टर, बकरी शेल्टर, पक्का फर्श निर्माण, यूरिन टैंक तथा पशुओं के लिए चारे की गाद, पशु आहार पूरक के रूप में अजोलाय मत्स्यपालन संबंधी कार्य जैसे कि सार्वजनिक भूमि पर मौसमी जल निकायों में मछली पालन, तटवर्ती क्षेत्रों में कार्य जैसे कि मछली सुखाने के यार्ड, बेल्ट बेजीटेबल क्षेत्र, ग्रामीण पेयजल संबंधी कार्य जैसे कि सोख्ता गड्ढा, रिचार्ज पिट्स, ग्रामीण स्वच्छता संबंधी कार्य जैसे कि वैयक्तिक पारिवारिक शौचालय, विद्यालय शौचालय, आंगनवाड़ी शौचालय, ठोस व तरल अपशिष्ट सामग्री प्रबंधन, आंगनवाड़ी केन्द्र का संनिर्माण, खेल के मैदानों का निर्माण हाल में ही खादय सुरक्षा कानून में दिये गये आनाज के भंडारण गृह भी बनाया जा सकता है। राज्य सरकार के परामर्श से केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले कोई अन्य कार्य कराये जा सकते हैं।
निजी भूमि पर भी काम
मनरेगा के नये काम तमाम व्यक्तिगत लोगों के निजी भूमि पर कराये जा सकते हैं। इन कामों में सीमांत और लघु किसानों की निजी भूमि पर भी हो सकता है। सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, घुमंतू जनजातियाँ, गरीबी रेखा के नीचे के परिवार व विधवा महिला, विकलांग, भूमि सुधार के लाभार्थी, इन्दिरा आवास के लाभार्थी आदि इनके पश्चात लघु और सीमांत किसानों को शामिल किया जा सकता है जिनका जाब कार्ड बना हो।
श्रम और सामग्री के अनुपात में हो बदलाव : सुरेन्द्र सिंह
मनरेगा में उत्कृष्ट कार्य के लिए रास्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले सुरेन्द्र सिंह आई. ए. एस. अधिकारी का मानना है कि कच्चे काम के अलावा मनरेगा का बहुत बड़ा स्कोप है अब लाभार्थियों और व्यक्तिगत की भूमि पर भी काम कराये जा सकते हैं। जैसे बंधे लगाना, पेड़ लगाना, नहर बनाना, सिंचाई के लिए नाली बनाना, बकरी पालन, शौचालय बनाना, आंगनबाड़ी केन्द्र बनाना, नेडप कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट आदि कच्चे काम नहीं हैं ये बड़े काम हैं होते रहेंगे लेकिन दिक्कत सबसे ज्यादा इस बात की है कि इसमें सामग्री का अनुपात बहुत ज्यादा है। मेरा मानना है कि मनरेगा में श्रम और सामग्री के अनुपात में बदलाव होना चाहिए। व्यक्तिगत कार्यों का स्कोप बढ़ाना चाहिए। मुजफ्फरनगर में जिलाधिकारी पद पर कार्य के दौरान मैने देखा कि पापुलर के वृक्ष वहां बहुत लगाये जाते हैं लेकिन यह काम मनरेगा से भी हो सकते थे इसलिए मैने वहां पापुलर और युकेलिप्टस के काफी प्लान्ट लगवाये। इस योजना से बाग लगवाए जा सकते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में यह बहुत कम हो रहा है। खेती भी मनरेगा से की जा सकती है। लेकिन लोग इस पर खर्च नहीं कर रहे हैं। क्योंकि इसकी प्रक्रिया थोड़ी सी कठिन है। ऐसा नहीं है कि काम नहीं है लेकिन पहले से ही लोग लम्बे समय सामान्य काम करते आ रहे हैं इसलिए लोगों को लग रहा है कि मनरेगा में काम खत्म हो रहा है।
पगार देना भी हो सकता है मुश्किल
सुरेन्द्र सिंह, लखनऊ
हात्मा गांधी नरेगा के प्रति प्रशासनिक उदासीनता ग्राम पंचायतों द्वारा योजना में रूचि ना लिए जाने से योजना में खर्च लगातार कम होता जा रहा है। वर्षों से विभिन्न योजनाओं सहित मनरेगा में कच्चे काम ही कराये जाते रहे हैं इससे गांव में लगातार कच्चे काम कम होते जा रहे हैं इसका कारण योजना में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी मिलना भी मुशिकल हो सकता है। मनरेगा कानून के अनुसार कुल खर्च का छह फीसदी ही प्रशासनिक व्यय किया जायेगा जिसमें सैलरी स्टेशनरी व अन्य खर्चे किए जा सकते हैं। जिसमें सरकार ने एक प्रतिशत धन सोशल आडिट के लिए अलग कर दिया है। ऐसे में मनरेगा में काम करने वाले भारी भरकम कर्मचारियों की फौज की सैलरी देना मुश्किल हो सकता है। मनरेगा में रोजगार सेवक तकनीकी सहायक कम्प्यूटर आपरेटर अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी लेखाधिकारी आदि काम करते हैं। इसके अलावां तमाम परिवहन स्टेशनरी आदि के खर्चे होते हैं। जिसे इसी पांच प्रतिशत से वहन किया जाता है। लेकिन लगातार मनरेगा में खर्चो में आ रही कमी के चलते नियमानुसार सैलरी देना भारी पड़ सकता है। समय से सेलरी देने के दबाव से निबटने के लिए राज्य सरकार ने एक आदेश जारी करते हुए कहा है कि जिस ब्लाक में प्रशासनिक मद ज्यादा पड़ा हो उस ब्लाक से लेकर अन्य ब्लाकों में खर्च कर दिया जाये। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने आदेश जारी करके मनरेगा में तकनीकी सहायक मेट को कोर कर्मचारी माना है ये जहां भी कम हो वहां उनकी नियुक्ति कर दी जाये एसे में लगातार खर्च बढता ही जा रहा है। यदि हम एक का गांव उदाहरण लें तो सिर्फ एक रोजगार सेवक को एक वर्ष की सैलरी देने के लिए ग्राम पंचायत को 8 लाख 40 हजार रूपए का काम कराना होगा। अगर केन्द्र के दिशा निदेशो कों देखे तो रोजगार सेवको पर प्रशासनिक मद का एक तिहाइ ही खर्च किया जा सकता है इनकी सेलरी देने के लिये ग्राम पंचायतो को 25 लाख से ज्यादा खर्च करना पडेगा। प्रदेश के तमाम ऐसे जिले हैं जहां 30 से 35 करोड़ रूपए भी खर्च नहीं हो पाते हैं। ऐसे में शासनादेश के अनुसार इनका मानदेय देने में समस्यायें पैदा होंगी। वहीं मनरेगा कर्मचारी अब अपने मानदेय को तिगुना करने के साथ साथ स्थायी करने की मांग कर रहे हैं। वही प्रशासनिक मद से मोबाइल फोन टेबलेट और समय समय पर बहुत सारे खर्च करने के निर्देश दिया गया है। ऐसे में मनरेगा के संविदाकर्मियों का भविष्य क्या होगा यह समय के गर्त में है। यदि मनरेगा में प्रशासनिक मद और ग्रामीण बजट में बढ़ोतरी के साथ नए काम में संशोधन नहीं किया गया तो मनरेगा कर्मियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या होता है प्रशासनिक मद?
मनरेगा में जितनी बजट खर्च किए जाते हैं उनका 6 प्रतिशत ही अन्य बातों के लिए खर्च किया जा सकता है। इसमें सोशल आडिट मानदेय परिवहन स्टेशनरी मेट का भुगतान कार्यस्थल पर पेयजल बोर्ड बच्चों के देखभाल का सामान यह मान लें कि लगभग गांव में मजदूरी और उसमें लगने वाले सामानों को छोड़कर सारे पैसे इसी मद से खर्च किए जाते हैं।
2 फरवरी को काम माँगो अभियान
देशभर में मनेरगा से व्यापक रूप में लोगों को जोड़ने के लिये 2 फरवरी को मनरेगा दिवस पर काम मांगो अभियान चलाया जायेगा। अभियान से जुड़े लोग घर-घर जाकर जाब कार्ड बनाने व उन्हें काम देने व उनकी समस्याओं को दूर करने का काम करेंगे। इस व्यापक अभियान में समाज के सभी वर्गो को शामिल किया जायेगा जिसमें स्वयंसेवी संस्थाएँ, नेहरु युवा केन्द्र, स्वयंसहायता समूह, एन एस एस और एन सी सी आदि के सहयोग से अभियान चलाया जायेगा। इससे पूर्व प्रत्येक गांव में तकनीकी सहायक और अन्य लोग मिलकर गाँव में 64 लाख रुपये खर्च करने का स्टीमेट बनायेगे और उनकी स्वीकृति करायेगे। यह अभियान पहले भी देश के 6 जिलों में प्रयोग के तौर पर 18 नवम्बर को चलाया गया था।
दुनिया के सर्वाधिक भ्रष्ट देशों में भारत भी
दुनिया के सबसे ज्यादा भ्रष्ट देशों में भारत भी शामिल है। भारत 177 देशों की सूची में 94वें स्थान पर है। चीन (80वां) और दक्षिण अफ्रीका व ब्राजील (72वां) भारत से कम भ्रष्ट देशों में शुमार हैं। ट्रासंपेरेंसी इंटरनेशनल के सर्वेक्षण के मुताबिक, सूची में शीर्ष स्थान पर काबिज डेनमार्क और न्यूजीलैंड 177 देशों में सबसे कम भ्रष्टाचार की चपेट में आए हैं, जबकि सोमालिया सबसे भ्रष्ट देश है। चिटफंड कंपनी का संचालक गिरफ्तार देश भर में 10 हजार से अधिक निवेशकों को करीब 17 करोड़ रुपयों की चपत लगाने का आरोपी आरबी शाक्या रविवार को इलाहाबाद पुलिस के हत्थे चढ़ गया। वह आठ साल से फरार था। पुलिस ने उसे दोपहर बाद यहां के सिविल लाइंस बस अड्डे से पकड़ने का दावा किया है। इलाहाबाद के रहने वाले आरबी शाक्या ने अपनी पत्‍‌नी मंजू शाक्या के साथ 31 दिसंबर 1982 को चिट फंड कंपनी खोली थी। तथागत स्माल स्केल इंडस्ट्री एंड इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड नामक चिटफंड एजेंसी का नेटवर्क देश भर में फैला था।
मिड-डे-मील घोटाले के आरोपी गिरफ्तार
मैनपुरी में हुए छह करोड़ 38 लाख के मिड-डे-मील घोटाले के आरोपी सर्च नामक स्वयंसेवी संगठन के संचालक अशोक चौहान को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने उसे शुक्रवार को गाजियाबाद में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस लाल की अदालत में पेश किया, जहां उसे 13 दिसंबर तक के लिए जेल भेज दिया।
स्पीक एशिया के संचालक गिरफ्तार
स्पीक एशिया के जरिये देश और विदेश के लाखों लोगों ठगने वाले शातिर दिमाग वाले शाहजहांपुर में ही पले पढ़े। नाम है-रामसुमिरन पाल व रामनिवास पाल। दोनों भाइयों ने शातिर दिमाग के दम पर उन्होंने न पूरी दुनिया में ठगी का जाल फैलाया बल्कि अरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया। मार्केटिंग मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद वे दोनों पीछे मुड़कर नहीं देखा।
मनरेगा का अपना सूचना अधिकार
ज्ञानप्रकाश जौनपुर


जन सूचना अधिकार लागू होने पर लोगों में इसकी प्रति जागरूकता बढी। लेकिन कई विभागों में इससे ज्यादा बेहतर नियम बनाये गये पर इसकी जानकारी न होने से इसका लाभ नहीं उठा पा रहे है। सूचना अधिकार में जहां व्यक्ति को एक माह में सूचनाएं मिलती थी वहीं प्रति पृष्ठ इसके लिए उसे दो रूपया देना पड़ता है और सूचना न मिलने पर अपील के लिए लखनऊ तक दरवाजा खटखटाना पड़ता है। किंतु कई योजनाओं में ऐसे नियम दिये गये हैं, जिनका उपयोग करके आप तीन दिनों में सूचनाएं ले सकते हैं। नि:शुल्क सूचनाएं देख सकते हैं और सूचना की प्रमाणित प्रति एक रुपए कॉपी में ही ले सकते हैं।
सूचना न देने पर जिला स्तर पर इसका निपटारा भी करा सकते हैं। मनरेगा में इस नियमावली के तहत किसी व्यक्ति ने अगर शिकायत दर्ज करायी है तो उसे अपनी शिकायत के समाधान के लिए या पुष्टि के लिए प्रमाण देने के लिए किसी कागज या अभिलेख देने की आवश्यकता है। वह इस नियम के तहत प्रार्थना दे सकता है और शिकायतकर्ता को उसे संबंधित व्यक्तियों को उसे नि:शुल्क दिखाना होगा। यदि कोई शिकायतकर्ता उसकी प्रमाणित प्रति की मांग करता है तो उसे एक रूपया प्रति कापी उपलब्ध कराया जायेगा।
मजदूरी में असमानता
मनरेगा में मजदूरी को लेकर कई प्रदेशो में असमानताएं हैं। जहां हरियाणा में एक दिन की मजदूरी 214 रूपए है वहीं चंण्डीगढ़ में 209, निकोबार जिले में 210, गोवा में 178, पंजाब में 184, कर्नाटक में 174, अरूणांचल प्रदेश में 135, असम में 152 रूपए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश इतना बड़ा प्रदेश है जहां मनरेगा मजदूरों को 142 रूपए ही मजदूरी मिलता है। पूर्वांचल में मजदूरों को काम मिल जाते हैं। लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दिल्ली से सटे जिलों में मनरेगा में काम करने के लिए कोई मजदूर आगे नहीं आता है। कई संगठनों ने मांग किया है कि मनरेगा में सुधार लाने के लिए मजदूरी की दरें बढ़नी चाहिए।
मनरेगा में अनिवार्य होगा आधार कार्ड
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण आधार कार्ड की सहायता से अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) की पूरी प्रक्रिया को कागज विहीन सुरक्षित और फायदेमंद बना रहा है। प्राधिकरण को उम्मीद है कि केवाईसी की प्रक्रिया इलेक्ट्रानिक हो जाने से ग्राहकों को सुविधा रहेगी और वे आसानी से पहचान और पता दाखिल कर सकेंगे। ग्राहकों के वर्तमान खातों में भी आधार नम्बर आ जाएगा।
क्या आप जानते हैं?
तथ्य सारणी
वर्ष 2011 के अंत में विश्व की जनसंख्या 7 अरब तक पहुंच जाएगी। यह संख्या 50 वर्ष पहले रहने वाले लोगों की संख्या के दोगुने से भी अधिक है. इनमें से लगभाग आधी आबादी महिलाओं और लड़कियों की है। एक अरब 1.2 अरब लोग गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इनमें से 70 प्रतिशत आबादी महिलाओं और बच्चों की है। एक अरब से भी अधिक वयस्क निरक्षर हैं। जिनमें 66 प्रतिशत आबादी महिलाओं की है। 2 करोड़ 70 लाख शरणार्थी हैं। जिनमें 80 प्रतिशत संख्या महिलाओं और बच्चों की है। प्रत्येक दिन हममें से एक अरब लोग भूखे सोते हैं। हममें से 2 अरब लोग प्रतिदिन एक डॉलर से भी कम राशिपर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। हममें से एक अरब लोग को स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है। गर्भावस्था या प्रसव के दौरान एक हजार से भी अधिक महिलाओं की मृत्यु हो जाती है।
करोड़ों के तालाब खुदे पानी का अता पता नहीं
व्यापक सर्वे में यह पाया गया है कि तालाब तो काफी खुदे पर उनमें पानी नहीं है। तालाब का काम एक सामान्य समझ की जरूरत मांगता है कि तालाब तो खुदे पर उसमें पानी कहां से आएगा उसका रास्ता भी देखना होगा। सामान्यत: जो तालाब मनरेगा में खुदे हैं उनमें कैचमेंन्ट का ध्यान रखा नहीं गया है। उससे हो यह रहा है कि तालाब रीते पड़े हैं। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना को दूसरे चरण में शहरों में भी लागू करने के लिए बेताब दिख रही है लेकिन इसके पहले चरण में जिस तरीके से काम हो रहा है उससे गांवों की दशा में बड़े बदलाव की उम्मीद बेमानी ही लगती है। करोड़ों रुपये के खर्च से सैकड़ों पोखरे एवं तालाब खुदे लेकिन उसमें पानी भरने के लिए महीनों से बरसात का इंतजार हो रहा था। कारण कि पानी भरने का बजट मनरेगा में है ही नहीं।
सोशल आडिट
मनरेगा में अपनी बात कहने का एक प्रभावी मंच है सोशल आडिट जिसमें गावं के सारे लोगों के सामने सभी अभिलेख व कागजात मौके पर रखे जाते हैं और उन्हें पढ़कर सुनाया जाता है। कार्यों की जांच की जाती है। यह आडिट हर माह होनी चाहिए। हालांकि अधिकारी और ग्राम प्रधान इस आडिट की सूचना पूरे गांव को लगने नहीं देते हैं। अपने संबधितों को बुलाते हैं आप इस आडिट के बारे में पता करके इसमें शामिल हो सकते हैं। सोशल आडिट की तिथि जानने के लिए आप मनरेगा की वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं।
घर बैठे ही कर सकते हैं काम की मांग
सुरेश गुप्ता
पैसे और समय दोनों की बचत के लिये अब आप आनलाईन घर बैठे ही कर सकते हैं शिकायतें और काम की मांग। अब आपको शिकायत और काम के लिए न ही किसी के चक्कर लगाने की जरूरत है और न ही किसी की मददत की जरूरत है। मनरेगा की इस वेबसाइट का इस्तेमाल गांव के सभी लोग आसानी से कर सकते हैं। इसकी मदद से जाब कार्ड बनवाने और काम की मांग करने के साथ-साथ शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है। आजकल गाँव में खुले सहज सेंटर तथा छात्रों को मिले लैपटॉप की मदद से यह काम बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है।
वाराणसी के सुरेश अपनी जाब कार्ड पर काम की मांग कर रहे हैं और उन्हें अभी तक काम नहीं मिल पाया है। लेकिन अब इन्हें परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है। वह सूचना तकनीकी का सहारा लेकर आसानी से अपने लिये काम की मांग कर सकता है। सरकार काम करने की गति में तेजी और पारदर्शिता लाने के लिए लगातार सूचना और तकनीकी पर विशेष जोर दे रही है। मनरेगा को बेहतर बनाने और उसकी कमियों में सुधार लाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारें इण्टरनेट और वेबसाईट का सहारा ले रही हैं। जिसके माध्यम से आप अपनी शिकायतें तो दर्ज करा ही सकते हैं और उसका निस्तारण क्या हुआ कम्प्यूटर पर घर बैठे देख सकते हैं। वहीं काम मांगने के लिए आपकों किसी प्रधान और ब्लाक पर भी जाने की आवश्यकता नहीं है। आप वेबसाईट और हेल्पलाइन पर ही काम मांग सकते हैं। राज्य सरकार की इस वेबसाईटhttp://www.mgnregaupsmvedan.in/   पर शिकायत करने जाब कार्ड के लिए आवेदन काम की मांग शिकायत की स्थिति आदि जाना जा सकता है।
वेबसाइट कैसे खोलें?
इण्टरनेट पर http://www.mgnregaupsmvedan.in/  टाइप करने के बाद आपके सामने एक पेज खुल जायेगा जिस पर-
1 शिकायत संबंधी रिपोर्ट देखा जा सकता है।
2 शिकायत के लिए पंजीकरण।
3 कार्य के लिए आवेदन पंजीकृत करने के लिए।
4 शिकायत की स्थिति जानने के लिए दिया गया है।
आप अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए माउस को दूसरे नम्बर पर दाहिने तरफ बने शिकायत बटन पर क्लिक करने पर आपको एक पेज खुल जायेगा जिसमें आप से जानकारी मांगी जायेगी। आपका नाम, पता, जिला व गांव की जानकारी मांगी जायेगी। जिसे भरने के बाद आप नीचे आयेंगे और उसमें जिले स्तर पर शिकायत करनी है या ग्राम स्तर पर चयन कर सकते हैं। चयन के बाद वेबसाईट में ये भी पूछा जायेगा कि आपकी शिकायत किसके खिलाफ है-रोजगार सेवक, सचिव, प्रधान, बी. डी. ओ. के अलावा अन्य भी दिया गया है जिस पर आप निशान लगा सकते हैं। अपनी शिकायत लिखने के बाद आपके शिकायत का प्रकार कि आपकी शिकायत किस समस्या से संबंधित है। जैसे जाब कार्ड, खाता भुगतान, परियोजना, रिश्वत, भ्रष्टाचार, नियुक्ति सूचना सहित अन्य या प्रधान से संबंधित कालम दिए गए हैं। जिस पर आपको जिससे संबंधित शिकायत हो उसे चुन सकते हैं। पूरा भरने के पश्चात आपके पास कोई सबूत या कागजात हो तो उसे भी सलंग्न करने की सुविधा दी गयी है। पूरी तरह भरने के बाद इसके पंजीकरण पर क्लिक करें जिसके बाद आपको शिकायत संख्या प्राप्त होगी। इसे संभाल कर रख ले। इस शिकायत संख्या से वेबसाईट पर शिकायत की स्थिति भी जानी जा सकता है।
आवेदन कैसे करें?
यह वेबसाईट उन लोगों के लिए भी उपयोगी है जो काम मांगना चाहते हैं या अपना जाब कार्ड बनवाना चाहते हैं। इसके लिए वे आनलाईन ही आवेदन कर सकते हैं। इस वेबसाईट पर दाहिने तरफ तीसरे डब्बे पर लिखे कार्य आवेदन और कार्य पंजीकरण लिखा हुआ है। उस पर आपको खुलने पर पंजीकरण और काम के कालम खुल जायेंगे जिस पर जाकर आप अपने जाब कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि आपका जाब कार्ड बना हुआ है और आपको काम चाहिए तो वेबसाईट पर ही काम के लिए आवेदन करने के लिए आपको अपना जाब कार्ड नम्बर डालना होगा। अंत में आपको एक नम्बर प्राप्त होगा जिसके माध्यम से आवेदन की स्थितियों को जाना जा सकता है। इसी तरह भारत सरकार की वेबसाइट www.rural.nic.in   पर जाकर भी शिकायत दर्ज करा सकते है आजकल गावों में छात्रों के पास कम्प्यूटर सामान्य तौर पर रहता है अन्यथा आप सहज केन्द्रों पर जाकर अपनी समस्यायें आसानी से सुलझा सकते हैं। वेबसाईट पर की गयी शिकायतें कम्प्यूटर पर दर्ज हो जाती है और इसकी लगातार मानीटरिंग की जाती है। जब तक ये शिकायते हल नहीं कर दी जाती हैं शासन इसकी जांच-पड़ताल करती रहती है।
शिकायतों पर 15 दिनों में करनी होगी कार्यवाही
संतोष गुप्ता
मनरेगा की यह नियमावली प्रशासन को समयबद्ध ढंग से शिकायतों का निपटारा करने के लिये बाध्य करता है। जिन शिकायतों को पहले रददी की टोकरी में फेंक दिया जाता है लेकिन अब इसके अंतर्गत शिकायत करने पर अधिकारियों को कार्यवाही करना आवश्यक हो जायेगा।

          
मनरेगा में 2009 से शिकायत करने के लिए एक सख्त नियम बनाया गया है इस नियम के अनुसार 15 दिनों के अन्दर शिकायत का निपटारा होना जरूरी है इसका निपटारा निर्धारित समय में न करने वाले अधिकारियों पर दंडित किया जायेगा। उत्तर प्रदेश रोजगार गारंटी शिकायत नियमावली 2009 जो 24 सितम्बर 2009 से ही लागू है। इसके तहत शिकायतों पर क्या कार्यवाई की गयी इसकी सूचना भी दी जाएगी। शिकायत कौन कर सकता है भारत को कोई भाी नागरिक या गैर सरकारी संगठन शिकायत कर सकता है। लेकिन यह शिकायत फर्जी नाम से नहीं किया जा सकता।
किस विषय पर शिकायत की जा सकती है
जॉब कार्ड के सम्बन्ध में, जॉब कार्ड पर काम न देने के सम्बन्ध में, कार्ड पर गलत प्रवृष्टि, समय पर काम न उपलब्ध कराना, सही समय पर भुगतान न किया जाना,फर्जी मस्टर रोल के माध्यम से धन का दुरूपयोग, योजना में ठेकेदारी या मशीन का प्रयोग, ग्राम पंचायतों को सही समय पर धन न देनाकार्य स्थल पर छाया, पानी तथा चिकित्सा उपलब्ध न कराना और पूर्व में की गयी किसी भी शिकायत का सही निस्तारण न किया गया हो तो भी शिकायत की जा सकती है।
शिकायत कहां करें?
सचिव/ सहायक विकास अधिकारी/ग्राम पंचायत/प्रधान/सचिव को किया जा सकता है।
शिकायत अगर निस्तारित नहीं किया जाता है तो उसके विरूद्ध अपील
शिकायत यदि निस्तारित नहीं की गयी है तो शिकायतकर्ता उसके विरूद्ध कार्यक्रम अधिकारी के यहां अपील कर सकता है। कार्यक्रम अधिकारी यदि शिकायत का निस्तारण नहीं करता है तो जिला कार्यक्रम समन्वयक से अपील की जा सकती है। यदि इन्होंने सही ढंग से शिकायत का निस्तारण नहीं किया तो अपील मनरेगा आयुक्त से की जा सकती है।
शिकायत कैसे भेजें
शिकायतें आप स्वयं या डाक/ई-मेल से भेजकर दर्ज करा सकते हैं।
कार्यवाही प्रक्रिया
शिकायत की जांच करने वाले अधिकारी शिकायत करने वाले को पांच दिन के अन्दर नोटिस देकर बुलायेगा। यदि शिकायत किसी व्यक्ति के विरूद्ध है तो उस व्यक्ति को भी बुलाया जायेगा। यदि मामले में मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण की आवश्यकता पड़ती हो तो सात दिन के अन्दर इसे किया जायेगा। 15 दिन के अन्दर शिकायतकर्ता की शिकायत निस्तारित करके लिखित आदेश दे दिया जायेगा। यदि शिकायत प्राप्त करने वाला अधिकारी किसी अधिकारी के विरूद्ध ही शिकायत की गयी है तो इसकी जांच अन्य अधिकारी से जो उससे वरिष्ठ होगा उससे करायी जायेगी।
शिकायतों के निस्तारण
प्रत्येक शिकायत 15 दिन के अन्दर अनिवार्य रूप से हल होनी चाहिए। अगर शिकायत 15 दिन के अन्दर निस्तारित नहीं किया गया तो निस्तारित करने वाले अधिकारी को अपने उपर के अधिकारी से इसकी अनुमति लेनी होगी और इसकी सूचना शिकायतकर्ता को भी दी जायेगी।
दण्ड
यदि शिकायतकर्ता की शिकायत का समाधान समय के अनुसार नहीं किया जाता है तो उस पर है प्रशासनिक कार्यवाही एवं एक हजार रुपए तक दण्ड लगाया जा सकता है। यदि शिकायतकर्ता की शिकायत में कोई अधिकारी/कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी और शिकायतकर्ता को इसकी सूचना दी जायेगी। इस नियम की जानकारी बहुत ही कम लोगों को है।
पारम्परिक एवं जैविक खेती
खाद्य गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा की तुलना
विनय कुमार मौर्या
विश्व को जैविक खेती की सौगात भारत और चीन की ही देन है। जब कभी भी जैविक खेती का इतिहास टटोला जायेगा तो भारत व चीन इसके मूल में होंगे। इन दोनों देशों की कृषि परम्परा लगभग चार हजार वर्ष पुरानी है। यहां के किसान चार सहस्त्राब्दि के कृषि ज्ञान-विज्ञान से भलीभांति परिपूर्ण है। जैविक खेती ही उन्हें इतने वर्षो तक पालती-पोसती रही है। जैविक खेती मुख्यत: निम्न सिध्दांतों पर आधारित है- जैविक खेती बहुत अधिक बाह्य उपादानों के उपयोग पर आश्रित नहीं है। इसके पोषण के लिये जल की अनावश्यक मात्रा भी जरूरत नहीं है। इस कारण यह प्रकृति के सबसे नजदीक है और यह ही इसका मूलभूत आदर्श है। इसकी पूरी विधा प्राकृतिक प्रक्रियाओं के सामंजस्य व उनके एक-दूसरे के उपर होने वाले प्रभाव की प्रकृति पर आधारित होने के कारण इससे न तो मृदाजनित तत्वों का दोहन होता है और न ही मृदा की उर्वरता का हास होता है। इस पूरी प्रक्रिया में मिट्टी एक जीवंत अंश है, मृदा में रहने वाले सभी जीव इसकी उर्वरता के प्रमुख अंग होते है और लगातार इसके उर्वरता संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं। अत: इनकी सुरक्षा व पोषण किसी भी कीमत पर आवश्यक है। कुल मिलाकर इस पूरी प्रक्रिया में पर्यावरण और मृदा संरक्षण इसके सबसे महत्वपूर्ण अंग है।
विश्व में लगभग सभी मामलों में लोगों में सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही सोच पायी जाती है। जैविक खेती विषय भी इससे अछूता नहीं है। दोनो ही के पास अपने पक्ष में और विरूद्व अनेक तर्क, वास्तविक तथ्य व मिथक है और दोनो एक-दूसरे की वास्तविकता को सिरे से ही नकारते हुए यह तर्क देते हैं कि यह टिकाऊ नहीं है या सूचना मिथ्या है या इसकी सत्यता की जॉंच नहीं की गई है। इन मिथकों व तर्कों की लंबी सूची में जहॉं कुछ तर्क सत्यता के करीब हैं तो कुछ सत्यता से परे केवल धारणाऐं हैं जिनका कोई आधार नहीं है तथा कुछ बहुत ही बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किये जा रहे हैं। जैविक और पारंपरिक खेती के विभिन्न पहलुओं को वैज्ञानिक आधार पर जॉंच कर उनकी सत्यता जानने का प्रयास किया जा रहा है। पारंपरिक खेती में रसायनो विशेषकर कीटनाशियों के अंधाधुंध प्रयोग से खाद्यों में रसायन अवशिष्टों का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि हम ध्यान से जॉंच करें तो पायेंगे कि यह तकनीकी दोष न होने के बजाय तकनीक के अनुचित प्रयोग का परिणाम है। बेतहाशा व अंधाधुंध रसायन प्रयोग, गलत कीटनाशी का गलत समय उपयोग, कटाई के बाद उत्पादों का कीटनाशी से उपचार व किसानो के बीच ज्यादा कीमत प्राप्त करने की लालसा इसके प्रमुख कारण हैं। परंतु ये सारे अपवाद तकनीक से ही उत्पन्न हुए हैं अत: उनसे होने वाली हानियों का भी दोष तकनीक को ही जायेगा। इसके विपरीत यह पाया गया है कि जैविक उत्पाद इस प्रकार के सभी रसायन अंशों से मुक्त होते हैं। पूरे विश्व में किये गये परिणामों व विश्लेषणों से यह सिद्व हुआ है कि जैविक उत्पादों में या तो रसायन अंश होते ही नहीं हैं या उनका स्तर जॉंच की सीमा से भी कम है। अत: यह निर्विवाद रूप से कहा जा सकता है कि जैविक उत्पाद रसायन अंशों से पूर्ण रूप से मुक्त हैं और पारंपरिक उत्पादों के मुकाबले अधिक स्वस्थ व सुरक्षित हैं। जैविक खेती में सभी प्रकार के रसायन प्रयोग पर प्रतिबंध होने के कारण वातावरण व मृदा भी रसायनों के दुष्प्रभावों से पूर्णत: मुक्त होते हैं। क्या जैविक उत्पादों का स्वाद अच्छा होता है? स्वाद के आधार पर गुणवत्ता का मूल्यांकन करना मुश्किल है क्योंकि अलग-अलग लोगों की उनकी आदत के अनुसार अलग-अलग स्वाद, पसंद और ज्ञान है। सामान्यत: जैविक पध्दति से उत्पादित फलों और सब्जियों के स्वाद में अंतर का कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है। पारंपरिक रूप से उगाई गई फल व सब्जियों में जल की मात्रा अधिक होती है जबकि जैविक उत्पादों में जल की मात्रा कम होने से उनकी सुगंध व स्वाद अंशों की मात्रा अधिक होती है इस कारण उनका स्वाद व गंध अधिक तीव्र होता है। परंतु इन दोनों में से कौनसा स्वादिष्ट होगा। यह अलग-अलग व्यक्तियों की अपनी पसंद व आदत पर निर्भर करता है। अनेक परीक्षण व जॉंच द्वारा सिद्व हुआ है कि जहॉं तक स्वाद अवयवों की बात है, तेल की बात है और स्वाद बढ़ाने वाले अवयवों की बात है तो उनकी मात्रा निर्विवाद रूप से जैविक उत्पादों में अधिक है। जैविक उत्पादों में जलीय अंश कम होने से उनका कुल शुष्क भार अधिक होता है अत: इस कारण उनमें पोषणों की मात्रा भी अधिक होती है। भौतिक रूप देखने पर क्या जैविक फल एवं सब्जिया भौतिक जैविक अच्छी दिखती है? आकार, रंग, मात्रा एवं दृढ़ता गुणवत्ता के प्राथमिक दृष्टव्य पहलु है। सत्यता को जानने के लिए इस संबंध में कई तुलनात्मक अध्ययन किये गये, परंतु ज्यादातर अध्ययनों में पाया गया कि परंपरागत एवं जैविक पद्धति से उत्पादित फलों सब्जियों में कोई दृष्टात्मक अंतर नहीं होता।
राजीव गांधी शिल्पी स्वास्थ्य बीमा योजना
इस लेख के माध्यम से आप इस योजना का बेहतर लाभ उठा सकते हैं। भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय द्वारा चलायी जा रही इस योजना में कोई भी कारीगर शामिल हो सकता है। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ कार्ड धारक अपनी जांच डाक्टर से करा सकता हैं। जबकि अन्य योजनाएं जैसे राजीव गांधी स्वास्थ्य बीमा योजना में भर्ती होने पर ही ईलाज हो सकता है। इस योजना का उद्देश्य कारीगर समुदाय को देश की सबसे अच्छी सुविधा देना जिसके लिए उसे धन खर्च न करना पड़े और अपना ईलाज अच्छी तरह करा सकें।
बीमा के लिये पात्रता
सभी कारीगर चाहे वह पुरुष अथवा महिला हो जिनकी आयु एक दिन से लेकर 80 वर्ष तक के बीच में हो। वह इस योजना में अपना कार्ड बनवा सकते है। स्कीम की प्रमुख विशिष्टतां इस योजना के लिए सरकार बीमा कम्पनी को 800 रुपये का भुगतान करती है। जिसमें सामान्य वर्ग के कारीगर को 150 रुपये और गरीबी रेखा के नीचे और अनुसूचित जाति जनजाति को 75 रुपये देना पड़ता है बाकी बचे पैसों को भुगतान सरकार करती है।
बीमा कवरेज
बीमा कम्पनी करीगर को इलाज किये गये खर्च को वापस कर देती हैए लेकिन यह इलाज तय सीमा में किये गये हो।
मेडिक्लेम
विवरण धनराशि (रुपयों में)
प्रति परिवार वार्षिक सीमा 15,000/-
पहले से मौजूद सभी बीमारियां और नई बीमारियां 15,000/-
प्रसूति लाभ (प्रत बच्चा, पहले दो बच्चों के लिए) 2500/-
दांतो का उपचार 250/-
आंखों का उपचार 75/-
चश्मा 250/-
आवासीय चिकित्सालयीयन (हॉस्पिटलाइजेशन) 4,000/-
आयुर्वैदिक/युनानी/होम्योपैथिक 4,000/-
पूर्व एवं पश्च चिकित्सालयीयन (हॉस्पिटलाइजेशन) 15,000/-
शिशु संबंधी कवरेज 500/-
ओ पी डी 7,500/-
प्रति बीमारी सीमा 7,500/-
नकद रहित सुविधा
बीमा कम्पनी देश भर में अस्पतालों को सूचीबद्ध करती हैं जहां कार्ड धारक बिना बिल भुगतान के अपना इलाज करा सकता है। यदि कोई रोगी ऐसे डाक्टर के पास जाता है जो उसकी सूची में नहीं है तो अपनी दवा की पर्ची बिल बाउचर कम्पनी के प्रतिनिधि को भेज सकता है। जांच पड़ताल के बाद उसके इलाज के खर्च का भुगतान बीमा कम्पनी कार्ड धारक को करेगी।
अवधि
यह पॉलिसी बीमाकर्ता द्वारा दिए गए प्रीमियम की तिथि से 12 माह तक वैध रहेगी।
लाभ
निजी दुर्घटना पर धनराशि 1 लाख रुपये
मृत्य होने पर धनराशि 1 लाख रुपये
किसी भी एक अंग का शरीर से अलग हो जाने से पूर्णतया और अपूर्णीय हानि होने पर धनराशि 1 लाख रुपये किसी भी एक अंग की शरीर से अलग हुए बिना पूर्णतया और अपूर्णीय हानि होने पर धनराशि 1 लाख रुपये।
ऐसी बीमारियों का उपचार नहीं कराया जा सकता
करेक्टिव कॉस्मेटिक सर्जरी अथवा उपचार, एच आई वी एड्स, गुप्त रोग, जानबूझकर स्वयं को चोटिल बनाना, मादक पदार्थों अथवा शराब का प्रयोग, युद्धदंगे हड़ताल, आतंकवादी कार्यवाही और परमाणु खतरा।
सूचीबद्ध अस्पताल -
इस योजना में इंश्योरेंस कंपनियों द्वरा अस्पतालों को सूचीबद्ध किया जाता है। इसकी जानकारी आप बीमा कंपनी से या हस्तशिल्प कार्यालय से ले सकते या टोल फ्री नम्बर 1800222555 पर जो बीएसएनएल एमटीएनएल से प्राप्त किया जा सकता है। टीपीए कार्यालय बीमा कम्पनी से सम्पर्क कर सकते हैं।
बीमा कम्पनियां पंजीकृत अस्पतालों को ईलाज करने के बाद लम्बे समय तक भुगतान नहीं करती हैं इसलिए कई बार कार्ड ले जाने पर वह ईलाज करने से मना कर देती हैं। बीमा कम्पनियों को कम क्लेम देना पड़े इसलिए वह अस्पतालों में मरीजों का कम से कम ईलाज करने का दबाव बनाती हैं और उन्हें वापस कर देती हैं। इसकी शिकायत इंश्योरेंस कम्पनी के टॉल फ्री नम्बर तथा कपड़ा मंत्रालय हैण्डीक्राप्ट बोर्ड में आप इसकी लिखित शिकायत करें। यदि किसी प्रकार की समस्या हो तो सोशल विजन की हेल्पलाइन नम्बर 8188887200 पर सम्पर्क कर जानकारी ले सकते हैं।
मंगला सिंह
चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री की दौड़ तक मोदी
मोदी के चाय बेचने के सवाल पर एक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उनके विपक्षी कहते हैं कि चाय बेचने वाला देश नहीं चला सकता है। वही मोदी कहते है- र्मै चाय ही बेचता था, लोग देश बेच रहे। आरोप प्रत्यारोप की उनकी भाषण शैली ने आम लोगो के बीच अपनी जगह बनाई साथ ही विवादों से उनका हमेशा नाता रहा गुजरात में हुए दंगे को लेकर देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने राज धर्म निभाने की नसीहत दी। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से उनका मनमुटाव भी अखबार की सुर्खिया रही आज प्रमुख विपक्षी दल भी उन्हें गंभीरता से लेने की बात करती हैं।
नरेंद्र दामोदर दास मोदी उर्फ नरेंद्र मोदी का जन्म बेहद साधारण परिवार में गुजरात के मेहसाणा जिले 17 सितम्बर 1950 में हुआ। वे अपने छह भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थे। नरेंद्र मोदी के जीवन में कई दिलचस्प उतार-चढ़ाव आए। ऐसा भी एक वक्त था जब वह चाय बेचा करते थे उन्होंने अपने भाई के साथ अहमदाबाद में स्टेट ट्रांसपोर्ट आफिस के बाहर चाय की दुकान खोल ली। कई साल तक नरेंद्र मोदी ने चाय बेचने का काम किया, यहां तक कि मोदी साइकिल पर केतली रखकर चाय बेचने निकल पड़ते थे। नरेंद्र मोदी की चाय की दुकान पर अक्सर शाखा से लौट रहे आरएसएस के लोग चाय पीने आते थे। चाय पीते-पीते मोदी की उनसे बातचीत भी होती थी, आरएसएस के लोगों पर मोदी की बोलने की शैली का खूब असर पड़ता था। एक दिन वहां लक्ष्मण राव इनामदार ने भी चाय पी और उन्होंने नरेंद्र मोदी से आरएसएस से फिर से जुड़ जाने की सलाह दी। कुछ दिनों बाद मोदी ने अपनी चाय की दुकान समेटी और आर एस एस के साथ पूरी तरह से जुड़ गए आगे बढ़ते हुए मोदी राजनीति में आ गए। मोदी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत आर एस एस के प्रचारक के तौर पर की। मोदी को भाजपा की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की गुजरात यूनिट की कमान सौंपी गई। 1987 नरेंद्र मोदी ने भाजपा जॉइन की। एक प्रभावशाली संगठनकर्ता के रूप में उन्होंने रणनीति बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाई। जो गुजरात में बीजेपी की जीत के लिए निर्णायक साबित हुई। 2001 केशुभाई पटेल की जगह नरेंद्र मोदी को गुजरात का सीएम नियुक्त कर दिया गया।
रामवृक्ष : लगन और मेहनत के प्रतीक
संघर्ष, मेहनत और लगन के बल पर भगवान उम्मीद से भी ज्यादा दे देता है। यह वाक्य वाराणसी के रामवृक्ष पर बिल्कुल सटीक बैठती है। रामवृक्ष चंदौली के मड़िया गांव के एक साधारण किसान के पुत्र हैं। चार भाईयों और तीन बहनों में दूसरे नंबर पर रामवृक्ष का शुरू से ही शिक्षा के प्रति लगाव रहा है। तीन भाई किसान हैं जो घर की स्थिति अच्छी न होने के कारण प्राइमरी तक ही पढ़ पाये लेकिन रामवृक्ष सिंह को डॉक्टर व अध्यापक बनने की ईच्छा थी इसलिए उन्होंने अपने घर से 15 किमी. दूर एक विद्यालय में एक टूटी हुई साइकिल से पढ़ाने जाते थे। जहां उन्हें 200 रुपये महीने के मिलते थे इसके अतिरिक्त रामवृक्ष खेत में भी काम करते, और इस तरह से उन्होंने एम.ए., बी.एड. किया। प्रबंधकीय विवाद के चलते विद्यालय बंद हो गया और उनकी 200 नौकरी छूट गई। अभावों के बीच उन्होंने शिक्षा की एक मशाल जलाई, उसके बाद उन्होंने अपने घर पर ही एक मड़ई में स्कूल खोला और दिवाल को ब्लैक बोर्ड बना लिया और गांव के बच्चों को पढ़ाने लगे। गांव के लोगों ने सुविधाओं की अपेक्षा शिक्षा को ज्यादा महत्व दिया और अपने बच्चों को वहां पढ़ने भेज दिया। कुछ लोगों ने उनके रास्ते में रूकवट डालने की कोशिश की और वहां पढ़ रहे बच्चों से कहते थे कि अब बरसात में ये स्कूल मड़ई में कैसे चलेगाए जब ये बात रामवृक्ष सिंह को मालूम हुआ तो उन्होंने वहां एक टीन सेट लगवा दिया और इस तरह से अपने संघर्ष को जारी रखा। अब उनके दो इण्टर कॉलेज हैं। सन् 2000 में हाईस्कूल, सन् 20006 में इण्टर की और सन् 2009 में केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की भी मान्यता प्राप्त हुई। अभावों के बीच संघर्ष करके उन्होंने शिक्षा की एक ऐसी मशाल जलाई कि आज रामवृक्ष सिंह अपने समाज और साथ ही अपने विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरक बन गये हैं।
जन सहयोग की अनूठी मिशाल ज्ञानसरोवर
जन सहयोग की अनूठी मिशाल आज ज्ञान सरोवर लोगों की प्रेरणा का प्रतीक बन चुका है। सरकार का करोड़ों रूपया खर्च होने और वर्षों का समय लगने वाले काम को जन सहयोग से बिना पैसे के लोगों ने अल्प समय में कर दिखाया़ जिसने यह साबित कर दिया कि सामाजिक सहयोग से असम्भव कार्य भी हो सकता है। संत रविदास नगर भदोही के ज्ञानपुर में स्थित ज्ञान सरोवर तालाब लोगों के घरों का गंदे पानी एवं कचरे का अम्बार बना हुआ था। तालाब से सटे हरिहरनाथ मंदिर में जाने वाले लोगों को तालाब से उठी दुर्गन्ध बेबस कर देती थी। लेकिन इसे साफ करने की पहल ज्ञानपुर नगर पंचायत के चेयरमैन हीरालाल मौर्या और उसके साथियों ने मिलकर इस काम को करने का बीडा उठाया, जब उनहोंने यह कार्य शुरू किया तो लोगों ने आचोलना किया कि इतना बड़ा तालाब और 20 वर्षों का कचरा कैसे साफ कर पायेंगे, लेकिन उनकी लगनए निष्ठा को देखकर अब लोग रोज सैकड़ों की संख्या में श्रमदान करने आते हैं।
कैसे होती है पंचायत की बैठक
इस कालम में आपको ग्राम सभा के विकास के लिये बनाये गये कानूनों के बारे में बताया जायेगा। इस बार पंचायत में होने वाले बैठक की कार्यवाही और कार्य के बारे में कानूनी जानकारी दी जा रही है।
बैठक की कार्यवाही (नियम 35 (क)
बैठक की कायार्ही पढ़कर सुनाई जायेगी और पुष्टि के बाद प्रधान उस पर हस्ताक्षर करेगा। पिछले महीने का हिसाब-किताब बैठक में रखा जायेगा और उस पर विचार किया जायेगा।
जो सूचना, निर्देश व आदेश मिले हो, उन्हें पढ़कर सुनाया जायेगा और उस पर विचार किया जायेगा।
सदस्य ऐसे ही सवाल पूछ सकते हैं, जो पंचायत से जुड़े हो किन्तु वे किसी अनावश्यक विवाद पैदा करने की सम्भावना वाला, काल्पनिक किसी जाति या व्यक्ति के लिए अपमानजनक प्रश्न नही पूछेंगे।
कार्यवाही की लिखी-पढ़ी हिन्दी में एक रजिस्टर में की जायेगी और कार्यवाही की नकल ए.डी.ओ. को बैठक के सात दिन के अन्दर दी जायेगी। (नियम 35)
बैठक में लिये गये फैसले पर तब तक दुबारा विचार नही किया जायेगा, जब तक कि 2/3 सदस्य लिखित रूप से दस्तखत कर इसके लिए प्राथना पत्र न दें। (नियम 40)
ग्राम पंचायत के कार्य (धारा-15)
खेती और बागवानी के विकास के साथ-साथ बंजर भूमि और चारागाह भूमि का विकास तथा उनके नाजायज कब्जे रोकने की व्यवस्था।
भूमि विकास, भूमि सुधार, भूमि संरक्षण व चकबन्दी में सरकार की सहायता। लघु सिचाई योजनाओं में जल के वितरण में सहायता तथा लघु सिचाईं परियोजनाओं का निर्माण, मरम्मत व देखभाल।
पालतू जानवरों, मुर्गी पालन, सुअर पालन आदि की तरक्की तथा पशुओं के नस्ल की सुधार के साथ-साथ दुग्ध उद्योग को बढ़ावा देना।
मछली पालन को बढ़ावा देना।
सार्वजनिक भूमि पर पेड़ लगाना व उनकी देखभाल करना तथा रेशम की खेती को बढ़ावा देना। वनों के छोटे-छोटे उत्पादों को बढ़ावा देना।
का आवंटन और आवास योजनाओं के क्रियान्वन में सहायता देना।
पानी पीने, कपड़ा धोने, नहाने के लिए सार्वजनिक कुओं, तालाबों, और पोखरों का निर्माण मरम्मत व देखभाल करना।
गांवों की सड़कों, पुलियों, पुलों और नौका घाटों का निर्माण व देखभाल तथा सार्वजनिक स्थानों अवैध कब्जा हटाना।
गांवों के सार्वजनिक मार्गों व अन्य जगहों पर प्रकाश की व्यवस्था तथा उसकी देखभाल करना।
ग्राम में गैर-पारम्परिक उर्जा स्त्रोतों के कार्यक्रमों को बढ़ावा देना तथा उनका क्रियान्वयन करना।
शिक्षा के संबंध में जागरूकता पैदा करना, बालिकाओं की शिक्षा पर विशेश ध्यान देना।
ग्रामीण कला एवं शिल्पकारों को बढ़ाव देना।
प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देना।
पुस्तकालय और वाचनालय की स्थापना और उसकी देखभाल।
गांवों में सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यों को बढ़ावा देना, स्थानीय त्यौहारों को मनाना, तथा खेलकूद के लिए ग्रामीण क्लबों की स्थापना तथा देखभाल।
गांव की सीमा में लगने वाले मेलों, बाजारों व हाटों पर नियंत्रण रखना।
ग्रामीण स्वच्छता व मनुष्य और पशु टीकाकरण कार्यक्रम कों बढ़ावा देना, महामारियों की रोकथाम के लिए कार्यवाही छुट्टा पशुओं को राकना।
जन्म, मृत्यु व विवाह का पंजीकरण कराना।
परिवार कल्याण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
पंचायत के आर्थिक विकास के लिए योजना तैयार करना।
गांव की महिलाओं और बच्चों के विकास तथा स्वास्थ्य व पोषण के लिए चलाये जा रहे कार्यक्रम के
क्रियान्वयन में भाग लेना व उन्हें बढ़ावा देना।
वार्षिक राशिफल-2014
मेष
मेष राशि वालों, जैसाकि वर्ष 2014 शुरू होने को है। सितारों की चाल बताती है कि वर्ष 2014 में आपको व्यापार में कुछ परेशानियाँ आ सकती हैं। राशिफल 2014 के मुताबिक शनि के प्रभाव से 2014 में आपके करियर की गति भी धीमी रह सकती है, विशेषकर वर्ष
की पहली छमाही में। 2014 का राशिफल बताता है कि इस दौरान आपके रिश्ते भी बुरे दौर से गुजरेंगे। मौजूदा समस्याएँ और बड़ी हो सकती हैं।
वृषभ
वृषभ राशिफल वालों के लिए यह वर्ष रिश्तों के लिहाज से बिलकुल भी सहयोगी नहीं है। राशिफल 2014 के अनुसारए यह वर्ष आपके लिए बड़े बदलाव लेकर आ रहा है। वर्ष 2014 बताता है कि इस वर्ष आपको काफी मेहनत करने की जरूरत है। लंबी दूरी के रिश्तों के लिए वर्ष 2014 शांत रहने वाला है।
मिथुन
मिथुन राशि वालों, ज्योतिष के अनुसार इस वर्ष का अंत आपके लिए काफी फायदेमंद होने वाला है। तब तक आपका जीवन उतार.चढ़ाव भरा रहेगा। राशिफल 2014 आपके लिए कई नए अवसर लेकर आएगा। वर्ष की दूसरी छमाही में सामाजिक रिश्ते बनाते समय जरा सावधान रहें। आपका भविष्यफल 2014 बता रहा है कि इस वर्ष आपकी आर्थिक स्थिति में बढ़ोत्तरी होगी। इस वर्ष आप अपने सभी पुराने उधार चुका देंगे। अगर आप अपने प्रेम संबंधों को लेकर गंभीर हैं तो वर्ष 2014 आपके लिए काफी लाभप्रद रहेगा।
कर्क
राशिफल 2014 के अनुसार इस वर्ष आपके आर्थिक और सामाजिक कद में इजाफा होगा। बेशक आपके पास नए अवसर होंगे, लेकिन साथ ही आपकी जिम्मेदारियों में भी इजाफा होगा। इससे आपके जीवन में तनाव बढ़ने का भी अंदेशा है। इसका असर आपकी पूरी सेहत पर पड़ेगा। राशीफल 2014 के मुताबिक आपको अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत है। इस वर्ष का आपका राशिफल कह रहा है कि आपको जुए.सट्टे आदि से दूर रहने की जरूरत है।
सिंह
सिंह राशि वालों, इस वर्ष आपको अपना लक्ष्य अधिक स्पष्ट नजर आएगा। आप अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने में आगे जरूर बढ़ेंगे लेकिन इसके लिए आपको कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। राशिफल 2014 के अनुसार संभव है कि चीजें आपकी योजनाओं के अनुसार न हों। साझेदार, दोस्तों और रिश्तेदारों से मिली आर्थिक सहायता आपको कई काम करने में मददगार साबित होगी।
कन्या
कार्यस्थल पर आपकी ख्याति में इजाफा होगा। आपकी तरक्की होने की भी पूरी संभावना है। लेकिन इससे आप पर काम का दबाव बढ़ जाएगा। किसी नए मौके की तलाश के लिए आपको अपनी सोच के दरवाजे खोलकर रखने होंगे। इससे आप इस वर्ष आपने वाले चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर पाएंगे।
तुला
तुला राशि के लिए 2014 एक शानदार वर्ष रहने वाला है। शनि और राहु 2014 के अधिकतर समय में आप पर असर डालने वाले हैं। राशिफल 2014 के मुताबिक इस वर्ष आपके जीवन में काफी बड़े बदलाव आने वाले हैं। जून तक आपको अपने कॅरियर में कुछ परेशानियाँ आ सकती हैं।
वृश्चिक
वृश्चिक राशि वालों के लिए वर्ष 2014 बीते वर्ष से बेहतर रहने की उम्मीभद है। इस वर्ष नए अवसर आपका इंतजार कर रहे हैं। आपके काम में बढ़ोत्तरी होगी। हालाँकि जून के बाद का वक़्त थोड़ा मुश्किल लग रहा है। आर्थिक मोर्चे पर थोड़ी अस्थिरता नजर आ रही है। आपका 2014 राशिफल बताता है कि खर्चे लगातार आपको तनाव में रखेंगे।
धनु
धनु राशि वालों के लिए यह वर्ष काफी अच्छा। रहने वाला है। मीडियाकर्मियों के लिए यह वर्ष लाभदायक नजर आ रहा है। राशिफल 2014 भविष्यवाणी करता है कि इस दौरान आपके व्यापपार में इजाफा होगा और इसके साथ ही साझेदार भी आपके साथ जुड़ सकते हैं। लेकिन साथियों के साथ मतभेद जरा चिंता का विषय बन सकते हैं। आर्थिक लिहाज से बात करें तो पहली छमाही आपके अनुकूल दिखाई दे रही है। अगर प्रेम संबंधों की बात करें, तो 2014 आपके लिए सकारात्महक रहने की उम्मीद है। वर्ष की दूसरी छमाही में बच्चोंक को कुछ परेशानी हो सकती है।
मकर
मकर राशि वालों के काम के लिहाज से यह वर्ष काफी अच्छा् रहने वाला है। हालाँकि महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ हो सकती हैं। व्यावपारिक मोर्चे पर आपको कुछ महत्वचपूर्ण फैसले लेने पड़ सकते हैं। वाणिज्यिक दृष्टि से भी वर्ष के पहले छह महीने आपके अनुकूल नजर आ रहे हैं। राशिफल 2014 के मुताबिक आपके खर्चों और कमाई में सही संतुलन बना रहेगा।
कुंभ
कुंभ राशि वालों के लिए बृहस्प़ति के प्रभाव से यह वर्ष काफी फायदे देने वाला लग रहा है। साल की पहली छमाही में आपको काफी यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं। आप बीते साल की ही तरह सकारात्मक सोच के साथ काम करते रहेंगे। इस दौरान आपकी कमाई बढ़ सकती है। राशिफल 2014 के मुताबिक फरवरी, जून और अक्टूबर में आपको संपत्ति, लाभ हो सकता है।
मीन
2014 राशिफल के अनुसार शनि और राहु तुला राशि में स्थित हैं। वर्ष 2014 आपके लिए अनुकूल नजर नहीं आ रहा है। ऐसा लग रहा है कि दूर रहने वाले लोग आपको परेशान कर सकते हैं। यहाँ तक कि आपका साथी भी आपको परेशान कर सकता है। जून के बाद हालात में सुधार होने की उम्मीद है। अगर आपके प्रेम संबंधों की बात करें, बृहस्पति में शुक्र का प्रभाव आपको आशावादी और स्वतंत्र बना सकता है।
गुणों से मालामाल मूली
विजय श्रीवास्तव योगाचार्य
सालभर मिलने वाली मूली पौष्टिकता से भी भरपूर होती है। प्रति सौ ग्राम मूली में मिलने वाले पोषक तत्वों में प्रोटीन 7 ग्राम, काबरेहाइड्रेट 3.4 ग्रामए वसा 1 ग्राम, ऊर्जा 17 मिग्राए खनिज 6 ग्राम, कैल्शियम 35 मिग्रा, फाइबर 8 ग्राम, फास्फोरस 22 मिग्रा, नायोसन 5 मिग्रा, विटामिन सी 15 मिग्रा आयरन 4 मिग्रा, कैरोटीन 3 मिग्रा और पानी 94.4 ग्राम पाया जाता है। कई लोगों को मूली खाने के बाद डकार के साथ या बिना डकार थोड़ी बदबू जरूर आती है, जिसे दूसरे लोग पसंद नहीं करते। लेकिन इसका कोई नुकसान  नहीं होता।
पत्ते भी हैं फायदेमंद
अक्सर लोग मूली खाकर उसके पत्तों को फेंक देते हैं, जबकि पत्तों में भी स्वाद तथा काफी मात्र में पोषक तत्व होते हैं। उन्हें भूजी, सब्जियां पराठों में प्रयोग करें। इसमें पतली-पतली फलियां भी आती हैंए जिसे मोंगर या मोंगरा के नाम से जाना जाता है। इन फलियों की सब्जियां बहुत स्वादिष्ट बनती हैं। हमेशा छोटी-पतली तथा ताजा मूली का ही प्रयोग करें। हड्डियों को मजबूती दे मूली खाने से शरीर की विषैली गैस कार्बन डाई आक्साइड का निष्कासन होता है तथा जीवनदायी आक्सीजन की प्राप्ति होती है। मूली खाने से दांत मंसूड़े मजबूत होते हैं हड्डियों में मजबूती आती है। थकान मिटाने और नींद लाने में भी मूली सहायक है।
पीलिया में फायदेमंद
यह उच्च रक्तचाप बवासीर की तकलीफ में लाभकारी है। इसका रस निकाल पीने से मूत्र रोगों में भी लाभ होता है। पीलिया रोग में ताजा मूली का प्रयोग बहुत ही उपयोगी है।
मोटापा से मुक्ति दिलाए
आज की महाबीमारी मोटापा से परेशान हैं तो इसके रस में नींबू व नमक मिला कर नियमित सेवन करें लाभ होगा। सिर में जूं पड़ रही हो तो इसका रस पानी में मिला कर धोएं।
हीमोग्लोबिन की कमी दूर करे
मूली के रस में सामान मात्र में अनार का रस मिला कर पीने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है।
दांतों को चमकाए
इसके खाने से रक्त विकार दूर होते हैं। त्वचा के दाग धब्बे हटते हैं। दांतों पर पीलापन हो तो मूली के टुकड़े पर नींबू का रस लगाकर दांतों पर धीरे-धीरे मलने से दांत साफ होंगे। इसके अलावा मूली को काट कर नींबू लगा कर छोटे-छोटे टुकड़े दांतों से काट कर धीरे-धीरे चबाएं। थोड़ी देर बाद उगल दें। ऐसा नियमित रूप से करने से दांतों पर चढ़ी पीली परतें हट जाएंगी।
पायरिया से राहत
पायरिया से परेशान लोग मूली के रस से दिन में 2-3 बार कुल्ले करें और इसका रस पिएं तो लाभ होगा। मूली के रस से कुल्ले करनाए मसूड़ों दांतों पर मलना और पीना दांतों के लिये बहुत लाभकारी है। मूली को चबा-चबा कर खाना दांतों व मसूड़ों को निरोग करता है।
कब्ज से राहत दिलाए
कब्ज से परेशान हैं तो मूली पर नींबू व नमक लगा कर सवेरे खाएं लाभ होगा। भोजन में मूली सलाद के रूप में लें तो और लाभ होगा। सुबह-शाम मूली का रस पीने से पुराने कब्ज में भी लाभ होता है। इस दौरान तला-भूना भोजन न खाएंए बल्कि खिचड़ी दलिया आदि खाएं।
पेट-दर्द में कारगर
पेट-दर्द परेशान करे तो मूली का रस नींबू मिला कर पिएं या मूली का अचार खाएं। मुंह की दुर्गंध दूर करे, मुंह से गंध आती हो तो मूली के पत्तों पर सेंधा नमक मिला कर सवेरे-सवेरे रोज खाएं दुर्गंध नष्ट होगी।
कैसे करें मिलावट की जांच (- मनभावती मिश्र)
खाद्य सामग्री : अरहर की दाल
मिलावट : खेसारी दाल
जांच : खेसारी दाल की बनावट पंच भुज की ठोस आकृति होती है। उसे भांति-
भांति देखकर अलग किया जा सकता है।
खाद्य सामग्री : कालीमिर्च
मिलावट : पपीते का बीज
जांच : पपीते के बीज गंधहीन होते हैं,उनका आकार अपेक्षाकृत छोटा होेता है।
खाद्य सामग्री : चावल
मिलावट : मिट्टी, रेत, कंकड़ चावल के छिलके पाउडर आदि।
जांच : यह सभी मिलावटी पदार्थ देखकर ही पनता किये जा सकते हैं। इन्हें चुनकर
व धोकर अलग किया जा सकता है।
खाद्य सामग्री : गेहूं
मिलावट : मिट्टी, रेत, कंकड, छिलके उतारा हुआ गेहूं आदि।
जांच भली-भांति अवलोकन करने एवं परखने से ही इन मिलावटी पदार्थों का पता
चल जाता है और इन्हें चुनकर धोकर तथा बीन कर निकाला जा सकता है।
फोटो नहीं, रोटी चाहिए बेटा...
उसकी बूझी सी प्रतिक्रिया कि बेटा तस्वीर छपने से क्या होगाउसके इस वाकय के बाद मैंने बात बदले हुए उसकी स्थिति के बारे में पूछा उसने बताया की मेरी हालत बहुत खराब है एक बेटा बुधिराम है जो पुणे में पत्थर तोड़ने का काम करता है उसका एक और बेटा भी अब जाकर पत्थर तोड़ने में उसकी मदद करता है।
बूढ़ी महिला के पहले पेज पर प्रकाशित पत्रिका को लेकर उसके घर जाते वक्त सोच रहा था कि उसकी मार्मिक हाथ जोड़े तस्वीर अपने आप में गांव की दशा बता रही थी जिसकी हजारों लोगों ने प्रशंसा की थी यह सोचते हुए कि उस बूढ़ी मां के गांव में उसकी फोटो दिखाउंगा तो वह कितनी प्रसन्न होगी यह सोचते-सोचते मैं उस गांव में पहुचकर फोटो दिखाकर लोगों से पूछा कि मुझे इस महिला के घर जाना है एक चाय वाले ने बताया कि कुछ दूर चले जाइये सड़क के किनारे ही उसका घर है। मैने उसका नाम पूछा तो उसने बताया कि उसका नाम कलुई है। संत रविदास नगर विकास भवन से चंद कदम दूर उस दलित महिला के घर पहुंचकर झोपड़ी के बाहर खेलते बच्चों से पूछा जिसका नाम पुझे गांव वाले पहले ही बता चुके थे वे बच्चे जाकर एक बूढ़ी मां को लाये उसके देखकर पहले ऐसा लगा कि हम इनकी ही तलाश हम कर रहे थे चेहरा काफी बीमार लग रहा था वह पहले से काफी कमजोर हो चुकी थी मैने बात चीत कर सिलसिला आगे बढ़ाया दादी आप तो बहुत बदल गयी है। क्या आप बिमार हैं मेरी बात सुनकर उस बूढ़ी मां ने कहा बेटा तीन महीने से बीमार हूं आप लोग कौन है और यहां क्यों आये हैं मैने बड़े उत्साह है। बताया कि मैने आप की तस्वीर अपनी पत्रिका के प्रथम पेज पर छपी है और उसके सामने रख दिया लेकिन उसकी बूझी सी प्रतिक्रिया कि बेटा तस्वीर छपने से क्या होगा, उसके इस वाकय के बाद मैंने बात बदले हुए उसकी स्थिति के बारे में पूछा उसने बताया की मेरी हालत बहुत खराब है एक बेटा बुधिराम है जो पुणे में पत्थर तोड़ने का काम करता है उसका एक और बेटा भी अब जाकर पत्थर तोड़ने में उसकी मदद करता है। उसकी एक लड़की पैसे के कारण कक्षा 8 के बाद पढ़ायी छोड़ चुकी है उसके दो बच्चे प्राइमरी स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं घर वालों को उसके बड़े होने का इंतजार है कि बड़े होकर वे अपने पिता के काम में मदद कर सके और परिवार का पेट पाल सकें।
उसका हाल सुनकर बुधिराम आजकल घर आया हुआ है और अपनी बूढ़ी मां का ईलाज करा रहा है। उसे आश्वासन देकर मैं घर की तरफ लौट चला और रास्ते में उधेड़ बुन के बीच सोचता रहा कोई अपनी फोटो छपवाने के लिए लाखों खर्च करने के लिए तैयार है और किसी के लिए रोटी कपड़ा और मकान ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह सवाल देश का अधिकांश पैसा गरीबों के लिए खर्च होता है लेकिन किन तक पहुंचता है यह पता लगाना बहुत मुश्किल है।
चुटकुले
किरायेदार
तूफान जोर का था। पत्नी की आंखों में नींद न थी लेकिन पति बड़े मजे से सो रहा था। आखिर पत्नी ने पति को जगाते हुए कहा, उठो भी, देखते नहीं मकान कैसा हिल रहा है, मानों अब गिरा। तुम चैन से सोओ जी, हम क्यों फिक्र करेंहम तो किरायेदार हैं। कह कर पति ने करवट बदल ली।
अच्छा किरायेदार
किरायेदार ने मकान मालिक से कहा, जब मै मकान छोड़ने लगा था तो मेरा पिछला मकान मालिक बहुत रोया था। नए मकान मालिक ने जवाब दिया, तुम इत्मीनान रखो, मैं कभी नहीं रोउंगाक्योंकि मैं हमेशा दो महीने का किराया एडवान्स लेता हूँ।
चाणक्य नीति
विष्णु भगवान जो तीनों लोकों के स्वामी हैं, अनेक शास्त्रों से उद्धृत राजनीति समुच्चय विषयक बातें कहते हैं।
शास्त्र के अनुसार अध्ययन करके सज्जन धर्मशास्त्र में कहे शुभाशुभ कार्य को जान लेते हैं।
लोगों की भलाई की बात करने वाला मनुष्य सर्वज्ञ हो जाता है।
मूर्ख शिष्य को उपदेश देने से, कर्कशा स्त्री का भरण पोषण करने से ओर दुखियों का सम्पर्क रखने से समझदार मनुष्य को भी दु:खी होना पडता है।
जिस मनुष्य की स्त्री दुष्टा है, नौकर उत्तर देनेवाला (मुँह लगा) है और जिस घर में साँप रहता है उस घर में जो रह रहा है तो निश्चय है
कि किसी न किसी रोज उसकी मौत होगी ही।
आपत्तिकाल के लिए धन को और धन से भी बढकर स्त्री की रक्षा करनी चाहिये। किन्तु स्त्री और धन से भी बढकर अपनी रक्षा करनी उचित है।
आपत्ति से बचने के लिए धन कि रक्षा करनी चाहिये। इस पर यह प्रश्न होता है कि श्रीमान् के पास आपत्ति आयेगी ही क्योंउत्तर देते हैं कि कोई ऐसा समय भी आ जाता है, जब लक्ष्मी महारानी भी चल देती हैं।
जिस देश में न सम्मान हो, न रोजी हो, न कोई भाई बन्धु हो और न विद्या का ही आगम होवहाँ निवास नहीं करना चाहिये।
विकास के चुनावी वादे और गाँव का दर्द
मजे की बात तो यह है कि विकास का हवाला देते हुए कांग्रेस के नेता यह बताते है कि उन्होने बड़ी-बड़ी सड़के बनवाई है तथा बड़ी-बड़ी विश्वविद्यालय या आई आई टी और आई आई एम बनवाया है। पर इनका गांव के विकास से कुछ भी लेना-देना नहीं है।
वम्बर-दिसम्बर में हुए पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों को अगले वर्ष के लोकसभा चुनावों का सेमीफाईनल मैच मानकर विभिन्न दल मैदान में उतरे है। मतदाताओं को रिझाने के लिए तरह तरह के वादे हुये हैं और लोकलुभवानी घोषणाएँ भी की गयी है। सत्ताधारी दलो ने दावा किया है कि उनकी सरकार ने समाज के हर वर्ग को कुछ न कुछ दिया है तथा सत्ता के आने के बाद और देने वादा किया है। पर क्या इससे गाँव का दर्द बटा है? यह अच्छी बात है की मतदाताओं को रिझाने के लिये हर छोटा बड़े राजनैतिक दल आज विकास की बात कर रहा हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का असली मुद्दा राम मंदिर है और कांग्रेस का असली मकसद भारत को विदेशी कंपनियों का बाजार बनाना है पर बात सब विकास की ही करते है। प्रश्न यह है की क्या विकास की फुटबाल खेलते इन दलों को गाँव की समस्याओं की समझ हैक्या यह लोग गाँवो के जीवन कि उस कड़वी सच्चाई को जानते हैं, जिनमे आज भी भारत की आधी से ज्यादा आबादी हताशा और अभावों का जीवन जीने को मजबूर है। भाजपा गुजरात विकास मॉडल कि बात करती है और कहती है कि वहाँ बड़े-बड़े कारखाने खुल रहे हैं और बड़ी-बड़ी सड़कें बन गईं हैं। पर इन कारखानों और सड़क के लिया जिन किसानों कि जमीन ली गई है उनमे अधिकांश परिवारों को मिला हैं चपरासी या गार्ड की 4000-5000 रुपये की प्रतिमाह की नौकरी का उपहार। गुजरात के ग्रामीण इलाकों में आज भी कुपोषण बहुत बड़ी समस्या है। राज्य के तमाम गाँवों के लोग पानी के अभाव में परेशान है। विकास के इस मोदी मॉडल से गाँव के गरीब किसानों का तो भला होने से रहा। हाँ मध्यवर्गीय उपभोक्ता वर्ग पर और अधिक क्रय शक्ति आ जायेगी।
कांगेस सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लाकर सस्ते अनाज मुहैया करने का वादा तो जरूर पूरा करती है पर उसको पूरा ध्यान वालमार्ट तथा अन्य बहुरास्ट्रीय कंपनियों के पूंजी निवेश और व्यापार पर है। मजे की बात तो यह है कि विकास का हवाला देते हुए कांग्रेस के नेता यह बताते है कि उन्होने बड़ी-बड़ी सड़के बनवाई है तथा बड़ी-बड़ी विश्वविद्यालय या आई आई टी और आई आई एम बनवाया है। पर इनका गांव के विकास से कुछ भी लेना-देना नहीं है। जीवन की सामान्य आवश्यकताओं और बेसिक शिक्षा का अभाव झेलते इस देश के गाँवो को आई आई टी और आई आई एम की जगह अच्छे बेसिक स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं की ज्यादा आवश्यकता है। भारत के गाँवो का विकास राजनैतिक दलों और उनके नेताओं की खैरात बांटने की मनोवृति से नहीं होगा।वास्तव मैं यह गाँवो की गारिम का अपमान है। गाँवो को शहरों की तरह ही अच्छे संस्थागत ढांचा की आवश्यकता है जिसके बारे में कोई भी दल बात नहीं कर रहा है कहीं अच्छा हो यदि हमारे राजनेता विकास की हवाई बाते न करके अपने क्षेत्र के गाँव के समग्र विकास का खाका मतदाताओं के सामने रखे और उस पर चर्चा हो। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पानीए बिजली और खेती तथा ग्रामीण कुटीर-उधोग के पूँजी निवेश जैसी समस्याएँ गंभीर विमर्श का विषय है न कि चुनावी प्रचार का फुटबाल मैच।

प्रो. प्रदीप के. माथुर लेखक जाने माने वरिष्ठ पत्रकार,मीडिया शिक्षक व राजनीतिक विश्लेषक हैं।

मैं पारंपरिक हूं प्यार के मामले में : दीपिका पादुकोण
अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का कहना है कि प्रेम के बारे में उनके विचार बहुत पारंपरिक हैं। दीपिका और राम लीला में उनके सह अभिनेता रणवीर सिंह की पर्दे पर जबरदस्त केमिस्ट्री चर्चा का विषय बनी हुई है। 27 वर्षीय अभिनेत्री विलियम शेक्सपीयर की अमर प्रेमकथा रोमियो एंड जूलियट पर आधारित इस फिल्म में आजाद ख्यालों वाली लड़की की भूमिका निभा रही हैं। दीपिका ने कहा कि मैं प्यार के पुराने तरीके में विश्वास रखती हूं जो मैंने अपने माता-पिता और मेरे परिवार के साथ बड़े होते हुए देखा है। प्रेम, विवाह और रिश्तों के मामले में मैं बहुत पारंपरिक हूं। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि मैं और कोई तरीका नहीं जानती। दीपिका राम लीला में संजय लीला भंसाली के साथ पहली बार काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह मेरे करियर की सबसे कठिन फिल्म है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि मुझे शूटिंग पर हर रोज एक खाली स्लेट की तरह जान पड़ता था और भंसाली मुझे फिल्म के अनुसार ढालते थे। ऐसे मुझे बहुत घबहराहट होती है जब आपको यह नहीं पता होता था कि आपका दिन कैसा जाएगा। राम लीला में शानदार नत्य करने वाली दीपिका ने कहा कि उन्होंने इसकी औपचारिक शिक्षा ग्रहण नहीं की है। दीपिका ने कहा, यह निश्चित ही थकाने वाला साल रहा। मैंने ये जवानी है दीवानी, चेन्नई एक्सप्रेस और राम लीला के लिए एक साथ काम किया लेकिन इन फिल्मों का परिणाम अच्छा रहा है और मैं इसे लेकर खुश हूं। संजय लीला भंसाली अपनी फिल्म रामलीला की लीला यानी दीपिका पादुकोण से बेहद प्रभावित हैं। फिल्म के बारे में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, दीपिका बेहद खूबसूरत हैं। मैंने वैजयंती माला के बाद इतनी खूबसूरती कहीं नहीं देखी। भंसाली ने इस फिल्म के सिलसिले में दीपिका के साथ हुई अपनी मुलाकात को कुछ यूं याद किया, वो सिंपल सूट पहने हुए थीं और बीमार थीं। उन्होंने कोई मेकअप भी नहीं किया था। फिर भी वो इतनी खूबसूरत लग रही थीं कि मैं बता नहीं सकता। मैंने ठान लिया कि बस यही है मेरी लीला। भंसाली ने कहा, कॉकटेल के हिट होने से दीपिका पादुकोण का आत्मविश्वास बढ़ गया। रामलीला में उन्होंने जो काम किया है वो देखते ही बनता है। रामलीला के लिए दीपिका पादुकोण पहली पसंद नहीं थीं। भंसाली इसके लिए करीना कपूर को लेना चाहते थे। मैं लंबे समय से करीना के साथ काम करना चाहता था लेकिन बात कुछ बन नहीं पा रही थी।

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3 टिप्पणियाँ:

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